राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कई अहम फैसले, CEO पद के लिए आए 5,200 आवेदन, चयन के लिए मांगा एक महीने का समय

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में CEO पद के लिए 5,200 आवेदनों पर निर्णय लेने के लिए एक महीने का समय मांगा गया। मंदिर के धार्मिक कार्यों के लिए पांच संतों की समिति भी गठित की गई।
राम मंदिर
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अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक संपन्न हो गई। बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, धार्मिक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने और नई नियुक्तियों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को आयोजित की जाएगी।

CEO पद के लिए 5,200 आवेदन

हाल ही में ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इस पद के लिए करीब 5,200 आवेदन प्राप्त हुए हैं। ट्रस्ट ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इसी कारण CEO के चयन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया है।

सचिव और प्रवक्ता नियुक्त करने का फैसला

बैठक में एक सचिव की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। साथ ही मीडिया और आम जनता से बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने का भी निर्णय लिया गया। हालांकि, अन्य नई नियुक्तियों को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इस पर आगे विचार किया जाएगा।

SIT रिपोर्ट पर नहीं हुई चर्चा

बैठक में राम मंदिर के स्वरूप या व्यवस्थाओं में किसी बड़े बदलाव को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि किसी बदलाव की आवश्यकता होगी तो उस पर समिति के गठन के बाद ही फैसला लिया जाएगा। मंदिर में चोरी की जांच कर रही SIT की रिपोर्ट पर भी इस बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई।

संतों को सौंपी जाएगी धार्मिक कार्यों की जिम्मेदारी

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर रहा। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव ने बताया कि मंदिर के धार्मिक कार्यों की जिम्मेदारी अयोध्या के संतों को सौंपी जाएगी। इसके लिए पांच संतों की एक धार्मिक समिति गठित की जाएगी, जिसमें कमल नयन दास महाराज समेत पांच संत शामिल होंगे।

यह समिति मंदिर में होने वाले सभी धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं की देखरेख करेगी। साथ ही, ट्रस्ट द्वारा प्रशिक्षित पुजारियों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था भी इसी समिति के अधीन होगी। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्य ट्रस्ट के पास रहेंगे, जबकि धार्मिक मामलों में संतों की समिति के निर्णयों का पालन किया जाएगा।

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