धनतेरस से पहले शेयर बाजार में दिवाली जैसी रौनक, निवेशकों की दौलत में 8 लाख करोड़ की बढ़ोतरी

धनतेरस से पहले शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. बाजार की बढ़त से निवेशकों की दौलत में करीब ₹8 लाख करोड़ का इजाफा हुआ.
धनतेरस से पहले शेयर बाजार में दिवाली जैसी रौनक

धनतेरस से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. गुरुवार, 5 नवंबर को कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल आया. सेंसेक्स करीब 2,000 अंक चढ़कर 79,300 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 550 अंकों की तेजी दर्ज की गई और यह 24,500 के पार निकल गया. बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा होने का अनुमान है.

इस तेजी को सेंसेक्स की इस साल की दूसरी सबसे बड़ी बढ़त बताया जा रहा है. इससे पहले 8 अप्रैल को सेंसेक्स में करीब 2,946 अंकों की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई थी. करीब सात महीने बाद बाजार में इतनी बड़ी उछाल देखने को मिली है. खास बात यह है कि शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी दिन तेजी बनी हुई है.

बाजार में तेजी की 4 बड़ी वजहें

शेयर बाजार में आई इस तेजी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अहम कारण माने जा रहे हैं. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से लेकर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट तक ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है.

1. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की पार्टी को झटका

अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बढ़त हासिल की है. इस नतीजे को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है.

बाजार में इस राजनीतिक बदलाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद बढ़ी है. इससे वैश्विक कारोबार और आर्थिक गतिविधियों में सुधार की संभावना जताई जा रही है. अमेरिकी शेयर बाजार में भी चुनाव परिणामों के बाद अच्छी तेजी देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर पड़ा.

2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का सस्ता होना भी है. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 94 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया.

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से देश के आयात बिल पर दबाव घट सकता है. इससे महंगाई को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

3. कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से बढ़ा भरोसा

सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों ने भी बाजार का माहौल बेहतर किया है. कई बड़ी कंपनियों ने उम्मीद से अच्छे परिणाम पेश किए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया है. सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आई तेजी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया और निवेशकों ने जमकर खरीदारी की.

4. डॉलर में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की वापसी

डॉलर में कमजोरी की उम्मीद और विदेशी निवेशकों की बढ़ती खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार में फिर से पैसा लगा रहे हैं।

जब डॉलर कमजोर होता है और वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा बढ़ता है, तो भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है। इससे शेयरों की मांग बढ़ती है और सेंसेक्स-निफ्टी को ऊपर जाने में मदद मिलती है।

लगातार छठे दिन बाजार में तेजी

भारतीय शेयर बाजार में 28 अक्टूबर से लगातार तेजी का रुख बना हुआ है. इस दौरान सेंसेक्स में लगातार खरीदारी देखने को मिली और बाजार ने कई अहम स्तर पार किए. 5 नवंबर की तेजी ने इस सकारात्मक रुझान को और मजबूत कर दिया है.

LTCG टैक्स में बदलाव की उम्मीद से FIIs का रुख बदला

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विशेषज्ञ डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, कंपनियों के बेहतर नतीजे, कच्चे तेल की कम कीमतें और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद ने विदेशी निवेशकों का नजरिया बदला है. उनके अनुसार, टैक्स व्यवस्था में संभावित राहत की चर्चा से भी विदेशी निवेशकों का भरोसा बेहतर हुआ है. हालांकि, LTCG टैक्स में बदलाव अभी एक संभावना और बाजार की उम्मीद है, कोई घोषित सरकारी फैसला नहीं.

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में आगे भी तेजी की उम्मीद

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहने पर लार्जकैप शेयरों में आगे भी रिकवरी देखने को मिल सकती है. खासतौर पर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की बड़ी कंपनियों में तेजी की संभावना जताई जा रही है. डॉ. विजयकुमार के मुताबिक, बड़े शेयरों में अभी और शॉर्ट कवरिंग हो सकती है, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है. हालांकि, उन्होंने निवेशकों को सावधान भी किया है. बाजार में तेजी आने के साथ घरेलू निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं. ऐसे में ऊंचे स्तरों पर शेयरों की बिकवाली बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है.

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