आखिर क्यों मनाई जाती है दिवाली? भगवान राम की अयोध्या वापसी के अलावा भी हैं कई मान्यताएं

दीपावली त्यौहार 8 नवंबर 2026 यानी रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व रोशनी मिठाइयों और आतिशबाजी का उत्सव है।इसके साथ-साथ बुराई पर अच्छाई अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की जीत की याद भी दिलाता है।
दीपावली
दीपावली

दीपावली त्यौहार 8 नवंबर 2026 यानी रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व रोशनी मिठाइयों और आतिशबाजी का उत्सव है।इसके साथ-साथ बुराई पर अच्छाई अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की जीत की याद भी दिलाता है। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है।लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे मानने की कई वजह हैं ?
पहली वजह दिवाली भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है वही देश के कई हिस्सों में इस पर्व से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं। सबसे पहले बता देते हैं दिवाली 2026 की तारीख इतिहास महत्व और इस उत्सव की कुछ ऐसी खास बातें जो दिवाली को पसंदीदा त्योहार बनाती हैं।

इस साल दिवाली का मुख्य पर्व 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा अगर हिंदू पंचांग की बात करें तो यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस को मनाया जाता है और इस दिन घरों मंदिरों सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में दिए जलाए जाते हैं।

दिवाली को दीपावली भी कहा जाता है क्योंकि संस्कृत में दीप का अर्थ दीपक और आवली का अर्थ पंक्ति यानी लाइन से होता है तो इसका सीधा अर्थ है दीपों की पंक्ति और दिए जलाने की वजह से ही इस बार को रोशनी का त्योहार कहा जाता है।

दिवाली के पीछे की कहानी

दिवाली के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता रामायण से जुड़ी है कहते हैं कि भगवान श्री राम ने अपना वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापसी की थी और उनके स्वागत में अयोध्या वासियों ने देव से अयोध्या को सजाया था और इसी खुशी में लोगों ने अपने घरों और रास्तों पर दिए जलाए तभी से कार्तिक अमावस्या पर दीप जलाने की परंपरा शुरू हो गई।

लेकिन दिवाली को केवल रामायण तक सीमित नहीं रखा जा सकता क्योंकि भारत के अलग-अलग हिस्सों और धर्म में इस त्यौहार को अलग-अलग विशेष महत्व दिया जाता है।

जैन धर्म की बात करें तो दिवाली को भगवान महावीर के निर्माण दिवस के रूप में मनाया जाता है सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस के रूप में दिवाली बनाई जाती है जो गुरु हरगोविंद सिंह साहब की रिहाई की हाथ से जुड़ा है। इसी वजह से दिवाली महज एक उत्सव नहीं भारत की सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत का प्रतीक है।

दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के होती है पूजा

दिवाली पर शाम को जरूर और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी धन वैभव सुख और समृद्धि की देवी मानी जाती है जबकि भगवान गणेश बुद्धि विवेक और शुभ शुरुआत के प्रतीक माना जाता है, दरअसल लक्ष्मी मां की पूजा परिवार में सुख समृद्धि जीवन में आर्थिक स्टार्ट और बिना किसी बाधा के कार्य पूरा करने के उद्देश्य से की जाती है.

दिवाली के पांचो दिन का महत्व

दिवाली 5 दिन का त्यौहार है इससे जुड़े परिवार स्वास्थ्य समृद्धि और रिश्तो की महत्वता को दिखाते हैं

धनतेरस

दीपावली की शुरुआत धनतेरस से होती है भगवान धन्वंतरि मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा इस दिन की जाती है साथ ही इस दिन सोना चांदी बर्तन और अन्य वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है.

नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली

छोटी दिवाली को नरकासुर पर भगवान श्री कृष्ण की जीत से जोड़कर देखा जाता है कई जगह सुबह नहाने और दीपदान के परंपरा है इस रूप चौदस भी कहते हैं.

दीपावली

दीपावली के दिन घरों में दिए जलाए जाते हैं और दूसरों और भगवान गणेश की पूजा होती है साथ ही परिवार के लोग एक दूसरे को मिठाइयां और उपहार देते हैं.

गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा भगवान श्री कृष्णा और गोवर्धन पर्वत की कथा से जुड़ी है मानते हैं कि भगवान कृष्ण ने बृजवासियों की सुरक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने छोटी उंगली पर उठा दिया था साथ ही इस दिन अन्नकूट बनाने की परंपरा भी है.

भैया दूज

भैया दूज को भाई-बहन के त्यौहार के रूप में देखा जाता है इस दिन बहनें अपने भाइयों के तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करते हैं।

इन त्योहारों की तिथियां और उत्सव के स्थानीय परंपरा में अंतर हो सकता है।

भारत के अलग-अलग राज्यों में कई तरह से दिवाली मनाई जाती है

दक्षिण भारत

दक्षिण भारत में दिवाली का संबंध भगवान कृष्ण की नरकासुर पर जीत से है यहां सुबह उठकर तेल स्नान करने और दीप जलाने की परंपरा प्रचलित है।

गुजरात

गुजरात में दिवाली को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में देखा जाता है यहां व्यापारी वर्ग नए खाता खोलता है और चोपड़ पूजन करता है।

महाराष्ट्र

दिवाली के दौरान अभ्यंग स्नान फल और भाई दूज का त्योहार बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में दिवाली पर पर मां काली की पूजा की जाती है और यहां काली पूजा के रूप में बड़े उत्साह के साथ यह त्यौहार मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में अयोध्या में यहां भगवान राम के आगमन की स्मृति में दीपावली को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है अयोध्या के साथ-साथ वाराणसी में भी घाटों पर दीपों की कतारें देखने को मिलते हैं।

कितनी बदल गई दिवाली

अगर पुराने समय से कंपेयर करें तो आज की दिवाली काफी बदल गई है मिट्टी के दीयों से लेकर बैटरी वाले दिनों तक समय के साथ दिवाली मनाने का तरीका पूरी तरह बदल गया है जहां पहले घरों में मिट्टी के दीपक फूलों से घर को रोशन किया जाता था वहीं आज एलइडी लाइट्स झालर और आधुनिक डेकोरेशन का चलन बढ़ गया है। वहीं अगर शॉपिंग की बात करें तो ऑनलाइन शॉपिंग डिजिटल गिफ्ट कार्ड और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म ने भी त्यौहार के बाजार को लगभग नया रूप दे दिया है।

बदलाव के इस दौर में मिट्टी के दीए बनाने वाले कलाकार छोटे दुकानदार बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। क्योंकि उनका रोजगार पूरी तरह से दीपावली त्यौहार पर निर्भर है उनके लिए दीपावली रोजगार का एक अच्छा समय है दिवाली का असली उत्सव भी तभी पूरा होता हुआ नजर आता है जब खुशियों की यह रोशनी उनके घर तक भी पहुंचे इसीलिए भारत अपडेट की अपील है कि आप सभी छोटे दुकानदारों और कुम्हार से दिए खरीद कर उनके घर तक भी रोशनी पहुंचने में मदद करें।

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