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महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक से शिंदे की लगातार दूरी: क्या महायुति में पनप रही है कोई नाराजगी?

महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक से शिंदे की लगातार दूरी
महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक से शिंदे की लगातार दूरी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट तेज हो गई है। महायुति सरकार के भीतर सब कुछ ठीक है या नहीं, इस सवाल ने फिर से जोर पकड़ लिया है। मुंबई समेत राज्य के कई नगर निकायों में मेयर पद को लेकर पहले से ही खींचतान जारी है, और अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की लगातार कैबिनेट बैठकों से गैरमौजूदगी ने इस सियासी बहस को और हवा दे दी है। क्या यह सिर्फ चुनावी रणनीति है या गठबंधन में कोई अंदरूनी नाराजगी पनप रही है?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हाल ही में दो महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल बैठकें आयोजित की गईं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ही बैठकों से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नदारद रहे। लगातार दूसरी बार अहम बैठक से दूरी बनाए जाने के बाद, राजनीतिक गलियारों में सवालों की बाढ़ आ गई है। सवाल उठ रहा है कि जब महापालिका नतीजों के बाद राज्य में कई अहम और रणनीतिक फैसले लिए जाने हैं, तब उपमुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी क्या सही संदेश देती है?

शिंदे की गैरहाजिरी को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से सफाई भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह जावली इलाके में जिला परिषद चुनावों को लेकर प्रचार सभाओं में व्यस्त हैं। इन रैलियों को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि हालिया महापालिका चुनावों में मिली सफलता के बाद शिंदे गुट का फोकस अब शहरी इलाकों से हटकर सीधे ग्रामीण महाराष्ट्र पर आ गया है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जिला परिषद चुनाव 2024-25 की सियासत का सेमीफाइनल माने जा रहे हैं, और शिंदे कैबिनेट की बजाय खुद मैदान में उतरकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

हालांकि, यह चुनावी मजबूरी का तर्क विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर रहा है। विपक्ष इसे महायुति में दरार बता रहा है, जबकि सत्ताधारी खेमे के नेता इसे केवल संगठन की मजबूती के लिए अपनाई गई आक्रामक चुनावी रणनीति करार दे रहे हैं। एक तरफ सत्ता के गलियारों में बैठकों की राजनीति है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर उतरकर जनता से सीधा संवाद। एकनाथ शिंदे का यह कदम चुनावी रणनीति है या फिर किसी बड़े सियासी संकेत की आहट, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर टिकी है।

फिलहाल, महायुति के अंदर की यह खामोशी कई गंभीर सवाल छोड़ रही है, जिनके जवाब आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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