बेंगलुरु: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट लागू करने की मांग करते हुए कहा कि सभी समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए। सिद्धारमैया ने दलितों, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की बात कही।
सिद्धारमैया रविवार को कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग महासंघ के सिल्वर जुबली समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने सामाजिक समानता और सभी समुदायों को समान अवसर देने की जरूरत पर जोर दिया।
‘आबादी के हिसाब से मिलना चाहिए आरक्षण’
सिद्धारमैया ने कहा कि समाज में समानता तभी स्थापित की जा सकती है, जब सभी समुदायों को उनकी आबादी के आधार पर उचित अवसर मिलें। उन्होंने जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट को लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि आरक्षण का निर्धारण समुदायों की आबादी के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिना समान अवसर के बराबरी वाला समाज बनाना संभव नहीं है। उनके मुताबिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।
‘सामाजिक न्याय चाहिए तो 75% आरक्षण जरूरी’
आरक्षण की सीमा बढ़ाने की वकालत करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, ‘अगर आप सभी को सामाजिक न्याय चाहिए, तो कम से कम 75 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए। दलित, पिछड़े समुदाय और अल्पसंख्यक- इन सभी को 75 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए।’
उनके इस बयान के बाद आरक्षण की सीमा और सामाजिक न्याय को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
अपने कार्यकाल की योजनाओं का भी किया जिक्र
कार्यक्रम के दौरान सिद्धारमैया ने पिछड़े वर्गों के लिए किए गए कामों और बजट का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछड़े वर्ग के लिए बजट, जो शुरुआत में करीब 5 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 4,461 करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में करीब 2.58 लाख छात्र पिछड़े समुदाय के लिए संचालित हॉस्टलों में रह रहे हैं। सिद्धारमैया ने शिक्षा और आवास से जुड़ी योजनाओं को भी सामाजिक उत्थान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
542 हॉस्टल और रेजिडेंशियल स्कूल बनाए गए
सिद्धारमैया ने मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूलों की स्थापना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2003 से 2018 के बीच 542 हॉस्टल और रेजिडेंशियल स्कूल बनाए गए थे।
उन्होंने विद्याश्री योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन छात्रों को हॉस्टल में जगह नहीं मिल पाती थी, उन्हें हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
केंद्र कर चुका है जाति जनगणना की घोषणा
जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार पहले ही आगामी जनगणना के साथ जाति आधारित गणना कराने की औपचारिक घोषणा कर चुकी है। इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।
सरकार की योजना के मुताबिक, देश में मुख्य जनगणना प्रक्रिया फरवरी 2027 से शुरू होगी। वहीं, कुछ विशेष राज्यों और बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया पहले शुरू की जाएगी।
ऐसे में सिद्धारमैया का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में जाति आधारित जनगणना, आरक्षण की सीमा और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक चर्चा लगातार तेज हो रही है।