अगर आप ई-कॉमर्स (e-commerce) के जरिए विदेश में अपना सामान बेचते हैं या छोटे स्तर पर निर्यात का कारोबार करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। केंद्र सरकार ने छोटे कारोबारियों और MSME निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए डाक के माध्यम से होने वाले निर्यात पर मिलने वाले इंसेंटिव का दायरा बढ़ा दिया है। इस कदम से दूरदराज के क्षेत्रों के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी लागत में भारी कमी आएगी।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस घोषणा के तहत, उन सभी सामानों पर ड्यूटी ड्रॉबैक (Duty Drawback), RoDTEP और RoSCTL जैसी निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का फायदा मिलेगा, जिन्हें अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से घोषित (electronically declared postal export) किया जाएगा।
छोटे निर्यातकों के लिए बड़ा बदलाव
यह फैसला खास तौर पर उन छोटे निर्यातकों और एमएसएमई (MSME) यूनिट्स के लिए गेम चेंजर साबित होगा, जो कम मात्रा में अपना सामान डाक के जरिए विदेश भेजते हैं। इस बदलाव के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
लागत में कमी: सरकारी प्रोत्साहन मिलने से निर्यातकों की परिचालन लागत (operational cost) कम होगी, जिससे वे विदेशी बाजारों में आसानी से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
दूरदराज क्षेत्रों को लाभ: छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों के कारोबारी, जिनकी बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तक पहुंच नहीं है, वे भी अब बिना किसी परेशानी के अपने उत्पादों का निर्यात कर सकेंगे।
डिजिटल प्रक्रिया: निर्यात की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल हो चुकी है, जिससे काम में तेजी आई है। इसके अलावा, सरकार सितंबर 2024 से IGST रिफंड को भी स्वचालित (automatic) तरीके से दे रही है।
ई-कॉमर्स और निर्यात को मजबूती
सरकार लंबे समय से ई-कॉमर्स निर्यात को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। फॉरेन ट्रेड पॉलिसी 2023 में पहली बार डिजिटल ट्रेड और क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स को विशेष पहचान दी गई थी। इस नीतिगत बदलाव को लागू करने के लिए ‘Postal Export Electronic Declaration नियम 2022’ में संशोधन किया गया है और इसकी अधिसूचना 15 जनवरी 2026 को जारी हुई है। वर्तमान में, देश में 28 विदेशी डाकघर (Foreign Post Offices) कार्यरत हैं, जो इस डिजिटल प्रक्रिया को समर्थन दे रहे हैं। इसके अलावा, CBIC और डाक विभाग ने मिलकर एक हब-एंड-स्पोक मॉडल (hub-and-spoke model) भी शुरू किया है, जिसके तहत 1,000 से अधिक निर्यात केंद्र काम कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह फैसला देश के निर्यात को आसान, सस्ता और ज्यादा समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे छोटे व्यवसाय वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत बना पाएंगे और देश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकेंगे।









