सोनम वांगचुक फिर शुरू करेंगे आंदोलन, 6 साल से अटकी इन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरेंगे पर्यावरणविद्

लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। छह साल पुरानी मांगों को लेकर वह दोबारा सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

लद्दाख के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की तैयारी हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 23 सितंबर को लेह में करीब 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह कार्यक्रम लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने जैसी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर होगा।

पहले यह पदयात्रा 19 से 23 सितंबर तक प्रस्तावित थी, लेकिन खराब मौसम, बढ़ती ठंड और क्षेत्र के राजनीतिक माहौल को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया। अब 23 सितंबर को एक दिन की सांकेतिक पदयात्रा आयोजित करने की घोषणा की गई है।

क्या है लद्दाख का पूरा विवाद?

31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के तहत लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। हालांकि, लद्दाख को विधानसभा नहीं दी गई। फिलहाल यहां प्रशासन उपराज्यपाल के जरिए चलता है। लद्दाख के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन लंबे समय से चाहते हैं कि क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और स्थानीय लोगों को शासन में अधिक अधिकार दिए जाएं।

क्यों चाहिए छठी अनुसूची?

लद्दाख की दूसरी प्रमुख मांग संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों को स्थानीय प्रशासन, जमीन, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े मामलों में विशेष संवैधानिक संरक्षण और स्वायत्तता मिलती है। लद्दाख के स्थानीय संगठनों का कहना है कि इससे क्षेत्र की जमीन, संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

सिर्फ राज्य का दर्जा ही नहीं, और भी हैं मांगें

लद्दाख के प्रतिनिधि केंद्र के साथ बातचीत में एक निर्वाचित विधानसभा, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की मांग भी उठा चुके हैं। इसके अलावा स्थानीय नेताओं ने पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासन पर निर्वाचित सरकार की अधिक भूमिका की मांग रखी है। अलग लद्दाख पब्लिक सर्विस कमीशन, अलग प्रशासनिक और पुलिस सेवाएं तथा वित्तीय और विधायी अधिकार भी उनकी मांगों में शामिल हैं।

केंद्र और लद्दाख के नेताओं के बीच बातचीत

लद्दाख की मांगों को लेकर केंद्र और स्थानीय संगठनों के बीच बातचीत कई दौर में हो चुकी है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह क्षेत्र की आकांक्षाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए संवाद जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मार्च 2026 में केंद्र ने सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत भी रद्द कर दी थी। लद्दाख के प्रतिनिधि कई मुद्दों पर अभी भी स्पष्ट संवैधानिक और राजनीतिक सुरक्षा चाहते हैं। अगस्त 2026 की बैठक में उन्होंने अपनी कई मांगों को “गैर-समझौतावादी” बताते हुए केंद्र के सामने रखा था।

2025 के आंदोलन की बरसी भी होगी

23 सितंबर की पदयात्रा के अगले दिन, 24 सितंबर को शहीद दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सितंबर 2025 में हुए हिंसक आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में होगा। 2025 के आंदोलन के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी। सोनम वांगचुक का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को फिर से सामने लाया जाएगा।

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