ट्रंप के बयान से सहमा शेयर बाजार, सेंसेक्स 1,878 अंक टूटा; निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला

Stock Market Crash
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अमेरिका-ईरान तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई, जिससे सेंसेक्स 1,878 अंक टूट गया और निवेशकों के करीब ₹8.56 लाख करोड़ स्वाहा हो गए।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। बुधवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते बीएसई सेंसेक्स 1,878.26 अंक (2.40%) गिरकर 76,302.46 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई।

निवेशकों के ₹8.56 लाख करोड़ डूबे

बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा। मंगलवार को सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 480.20 लाख करोड़ रुपये था, जो बुधवार को घटकर 471.64 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8.56 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

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इन दिग्गज शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट

सेंसेक्स की गिरावट में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। इंटरग्लोब एविएशन, HUL, मारुति सुजुकी, ITC, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और एक्सिस बैंक के शेयरों में 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। अधिकांश ब्लूचिप शेयर लाल निशान में बंद हुए।

अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बढ़ा तनाव माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम समझौते को लेकर दिए गए बयान के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम के कारण वैश्विक बाजारों में भी दबाव देखने को मिला, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।

कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल

तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें भी करीब 6% बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल दोनों बढ़ सकते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश अपनी तेल जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर दोबारा दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान के घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में इन्हीं कारकों से शेयर बाजार की दिशा तय हो सकती है।

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