US-Iran Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को “छोटी-मोटी झड़प” करार देते हुए दावा किया कि तेहरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन हर बार बातचीत के दौरान अपनी शर्तें बदल देता है। ट्रंप ने यह टिप्पणी जॉर्जिया के मैरिएटा में अपनी सरकार की पहल ‘ट्रंप अकाउंट्स’ कार्यक्रम के दौरान की।
‘ईरान समझौता चाहता है, लेकिन अभी तैयार नहीं’
ट्रंप ने कहा, “ईरान के साथ जो झड़प चल रही है, मैं उसे यही कहूंगा क्योंकि उन्हें बहुत जोरदार चोट लगी है और वे समझौता करना चाहते हैं। लेकिन हर बार जब वे डील करते हैं, तो उसमें बदलाव करना चाहते हैं। वे अभी तैयार नहीं हैं, हालांकि मुझे विश्वास है कि वे बहुत जल्द तैयार हो जाएंगे।”
उन्होंने अपने संबोधन में ईरान पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक का भी जिक्र किया और संकेत दिया कि फिलहाल दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की राह आसान नहीं है।
शहीद अमेरिकी सैनिक के परिवार को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में शहीद हुए अमेरिकी सैनिक लेफ्टिनेंट टायलर फीहन के परिवार को सम्मानित किया। इससे पहले वह डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पहुंचे थे, जहां ईरान के साथ संघर्ष में मारे गए चार अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक वापस लाया गया।
बाइडेन पर साधा निशाना
अपने संबोधन में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और डेमोक्रेट प्रशासन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब दुनिया अमेरिका का मजाक नहीं उड़ाती।
ट्रंप ने कहा, “18 महीने पहले अमेरिका बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा था। ‘स्लीपी’ जो बाइडेन और कट्टरपंथी वामपंथी डेमोक्रेट्स ने पिछले 48 वर्षों की सबसे अधिक महंगाई देश पर थोप दी थी।”
ईरान की अमेरिका को चेतावनी
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अमेरिकी एयरस्ट्राइक की धमकियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के बुनियादी ढांचे या किसी भी रणनीतिक ठिकाने पर हमला हुआ तो उसका “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।
हूती विद्रोहियों का बड़ा ऐलान
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) को सऊदी अरब के लिए बंद करने का ऐलान किया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और दुनिया के लगभग 12 प्रतिशत व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।