उत्तर प्रदेश के 3.7 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई में राहत मिलेगी, क्योंकि ईंधन अधिभार शुल्क 4.43% घटने से बिजली बिल जून के मुकाबले कम आएगा।
उत्तर प्रदेश के करीब 3.7 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। जुलाई महीने में आने वाला बिजली बिल जून के मुकाबले कम होगा। इसकी वजह ईंधन अधिभार शुल्क (Fuel Surcharge) में 4.43 प्रतिशत की कटौती है। इस फैसले से घरेलू, व्यावसायिक और अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
पिछले महीने बिजली बिल में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिली थी। जून में बिजली बिल पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क लगाया गया था, जिससे लाखों लोगों का बिल सामान्य से अधिक आया था। अब नई गणना के बाद जुलाई में यह अतिरिक्त बोझ कम हो जाएगा।
दरअसल, बिजली उत्पादन और बाहर से बिजली खरीदने की लागत हर महीने बदलती रहती है। इसी लागत के आधार पर बिजली कंपनियां ईंधन अधिभार शुल्क तय करती हैं। जब बिजली खरीद महंगी होती है तो यह शुल्क बढ़ जाता है और उपभोक्ताओं का बिल भी बढ़ जाता है। वहीं लागत कम होने पर यह शुल्क घटा दिया जाता है, जिससे बिजली बिल में राहत मिलती है।
जून महीने में बढ़े हुए बिल को लेकर विवाद भी हुआ था। जांच में सामने आया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने मार्च महीने के वास्तविक खर्च के साथ पुराने बकाया भुगतान को भी जोड़ दिया था। इसी कारण ईंधन अधिभार शुल्क बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुंच गया और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मामला बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सख्ती दिखाई और पावर कॉरपोरेशन से जवाब मांगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि ईंधन अधिभार शुल्क की गणना केवल संबंधित महीने की वास्तविक बिजली खरीद लागत के आधार पर ही की जाएगी। पुराने बकाया भुगतान को इसमें शामिल करना नियमों के खिलाफ है।
आयोग के निर्देश के बाद जुलाई के लिए दोबारा गणना की गई, जिसमें ईंधन अधिभार शुल्क 4.43 प्रतिशत कम निर्धारित किया गया। इससे पूरे प्रदेश के उपभोक्ताओं को लगभग 358.31 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसे उपभोक्ताओं की बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि अप्रैल महीने में बिजली खरीद की वास्तविक लागत अनुमान से कम रही थी, इसलिए उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जून महीने में यदि उपभोक्ताओं से जरूरत से ज्यादा राशि वसूली गई है तो बिजली विभाग उसकी समीक्षा कर अतिरिक्त रकम वापस करे।
अब जुलाई महीने में आने वाले बिजली बिल में उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिलेगी। यदि भविष्य में भी बिजली खरीद की लागत कम रहती है, तो ईंधन अधिभार शुल्क में इसी तरह बदलाव होता रहेगा और बिजली बिल भी उसी हिसाब से घटता-बढ़ता रहेगा।


