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अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में भूचाल: क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में उबाल

वैश्विक राजनीति की गर्माहट अब सीधे आपकी जेब पर असर डाल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जबरदस्त उबाल ला दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतें चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसने भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है।

गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जो सितंबर के बाद पहली बार हुआ है। इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी मानी जा रही है। लंदन बाजार में ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड 2.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 2.6 प्रतिशत उछलकर 64.82 डॉलर प्रति बैरल हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेल की कीमतों में यह तेजी वास्तविक आपूर्ति संकट से ज्यादा भविष्य के खतरे को लेकर निवेशकों की चिंता का नतीजा है।तनाव की जड़ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच जारी टकराव है। इस संबंध में महत्वपूर्ण बयान सामने आए हैं:उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान से तुरंत बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए चेतावनी दी। उन्होंने साफ किया कि कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जिसमें ईरान के पास परमाणु हथियार न हों।इसके जवाब में, विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका को चेताया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का तुरंत और सख्त जवाब दिया जाएगा, जिससे मध्य पूर्व में संघर्ष की आशंका और बढ़ गई है।विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दो बड़े खतरे मंडरा सकते हैं। पहला, ईरान के लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन के तेल उत्पादन पर खतरा होगा। दूसरा, दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। मौजूदा हालात में निवेशक तेल को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं, जिसने कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

यदि यह भू-राजनीतिक तनाव जल्द कम नहीं होता है, तो वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने के साथ-साथ भारत जैसे तेल आयातक देशों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ना तय है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।

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