नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब ईरान की विमानन कंपनियों पर भी बड़ा दबाव बनाया गया है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि 23 सितंबर 2026 से ईरान की एयरलाइंस के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में काम करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका ने विदेशी हवाई अड्डों, ईंधन कंपनियों और दूसरी विमानन सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को ईरानी एयरलाइंस की मदद करने पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने की चेतावनी दी है।
23 सितंबर से क्या बदल सकता है?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को एक साक्षात्कार में कहा कि 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस को दुनिया भर में रोकने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई विदेशी हवाई अड्डा ईरानी विमान को उतरने की सुविधा देता है, उसे ईंधन देता है या टिकट बेचने जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है तो उस कंपनी पर अमेरिका की ओर से कार्रवाई हो सकती है।
इसका मतलब यह है कि ईरानी एयरलाइंस के लिए विदेशों में उड़ान चलाना सिर्फ विमान और चालक दल की उपलब्धता पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें जरूरी जमीन पर मिलने वाली सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
ईरानी एयरलाइंस को किन सेवाओं की जरूरत होती है?
किसी अंतरराष्ट्रीय उड़ान को संचालित करने के लिए विमान के अलावा कई सेवाओं की जरूरत होती है।
इनमें शामिल हैं:
- हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति
- विमान में ईंधन भरना
- जमीन पर विमान की देखभाल
- यात्रियों की टिकट व्यवस्था
- सामान संभालने की सेवाएं
- दूसरी हवाई अड्डा सेवाएं
अमेरिका की चेतावनी के बाद इन सेवाओं से जुड़ी विदेशी कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
डॉलर व्यवस्था से बाहर करने की चेतावनी
स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने का जोखिम हो सकता है। अमेरिका का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय विमानन कारोबार में भुगतान और वित्तीय लेनदेन के लिए डॉलर व्यवस्था की बड़ी भूमिका है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों का डर कई विदेशी कंपनियों को ईरानी एयरलाइंस के साथ कारोबार पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।
पहले भी ईरानी विमानन क्षेत्र पर लगे हैं प्रतिबंध
अमेरिका ने इसी महीने ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े कई संस्थानों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, 8 सितंबर को अमेरिकी वित्त विभाग ने 36 ठिकानों को निशाना बनाया था, जिनमें 27 ईरानी एयरलाइंस शामिल थीं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान का विमानन क्षेत्र उसकी व्यापक सैन्य और खरीद व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर वॉशिंगटन ने विमानन क्षेत्र पर दबाव बढ़ाया है।
ईरान की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पहले से असर
अमेरिकी दबाव बढ़ने से पहले ही ईरान की अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर असर दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की प्रमुख एयरलाइन महन एयर ने इस्तांबुल, अंकारा और मस्कट के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रोक दी हैं। ईरान का विमानन क्षेत्र लंबे समय से प्रतिबंधों और पुराने विमानों की समस्या से भी जूझ रहा है। इससे विदेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए विकल्प और सीमित हो सकते हैं।
दूसरे देशों पर भी बढ़ेगा दबाव
अमेरिका की कार्रवाई सिर्फ ईरानी एयरलाइंस तक सीमित नहीं है। असली दबाव उन विदेशी कंपनियों पर है जो इन एयरलाइंस को सेवाएं देती हैं। अगर कोई देश या कंपनी अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना ईरानी विमानों को ईंधन, उतरने की सुविधा या टिकट से जुड़ी सेवाएं देती है, तो उस पर भी कार्रवाई का खतरा हो सकता है। इसी वजह से आने वाले दिनों में कई देशों की विमानन कंपनियों और हवाई अड्डों के फैसले महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इराक ने भी उड़ानों पर कदम उठाया
अमेरिकी चेतावनी के बाद इराक में भी ईरानी एयरलाइंस को लेकर कार्रवाई की खबर सामने आई है। इराकी सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बगदाद अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को रोकने की तैयारी में है। इससे पता चलता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का असर ईरान के आसपास के देशों की विमानन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर विदेशी हवाई अड्डे ईरानी एयरलाइंस को जरूरी सेवाएं देना कम या बंद करते हैं, तो यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो सकती हैं, कुछ मार्ग बंद हो सकते हैं और यात्रियों को दूसरे देशों के रास्ते यात्रा करनी पड़ सकती है। ईरान से बाहर रहने वाले लोगों के लिए अपने परिवारों से मिलने और वापस देश लौटने के विकल्प भी कम हो सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी
ईरानी एयरलाइंस पर कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और सैन्य दबाव के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी तनाव जारी है। अमेरिकी सरकार ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रही है, जबकि ईरान की ओर से भी अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
23 सितंबर 2026 से अमेरिका ईरानी एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली जरूरी सेवाओं को रोकने के लिए विदेशी कंपनियों पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ा रहा है। अगर हवाई अड्डे, ईंधन कंपनियां और दूसरी सेवा प्रदाता कंपनियां ईरानी एयरलाइंस से दूरी बनाती हैं, तो उनकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें चलाना काफी मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल इस कदम का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग देश और विमानन कंपनियां अमेरिकी चेतावनी के बाद क्या फैसला लेती हैं।