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उत्तराखंड-पंजाब विवाद: कर्णप्रयाग की झड़प से बॉर्डर तक कैसे पहुंचा मामला? जानिए पूरा घटनाक्रम

उत्तराखंड-पंजाब विवाद

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला गिरफ्तारी, विरोध प्रदर्शन और बॉर्डर तक पहुंचे निहंग जत्थे के बाद दो राज्यों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हुई एक मामूली कहासुनी देखते ही देखते दो राज्यों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गई। निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में गिरफ्तारी, विरोध प्रदर्शन, गुरुद्वारे में तनाव और उत्तराखंड सीमा तक पहुंचे जत्थे तक पहुंच गया। हालांकि पुलिस और प्रशासन की पहल के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

बताया जाता है कि 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पार्किंग को लेकर निहंग सिखों और एक स्थानीय दुकानदार के बीच विवाद हो गया, देखते ही देखते कहासुनी हाथापाई में बदल गई, आरोप है कि झड़प के दौरान धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें कुछ 4 स्थानीय लोग और वहीं एक निहंग सिख के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद बढ़ा विरोध

गिरफ्तारी के बाद पंजाब के कई निहंग संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि उनके साथ एकतरफा कार्रवाई की गई, जबकि दूसरे पक्ष की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, इसी बीच 21 जून को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया, विवाद के दौरान रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में भी तनाव की स्थिति पैदा हुई। प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार कुछ निहंग वहां रुके रहे, जबकि अलग-अलग पक्षों ने इस घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए, करीब तीन दिन तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस और सिख प्रतिनिधियों की बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हुई और संबंधित लोग गुरुद्वारा परिसर से बाहर आ गए।

स्थानीय लोगों में भी दिखी नाराजगी

नगरासू की घटना के बाद कई स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि पूरे घटनाक्रम में कानूनी कार्रवाई पर्याप्त हुई या नहीं। वहीं दूसरी ओर निहंग संगठनों का कहना था कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया गया, इसी वजह से दोनों पक्षों में नाराजगी बनी रही।

25 जून को उत्तराखंड जाने का ऐलान हुआ था

इन्ही विवाद के बीच पंजाब के मोहाली स्थित गुरुद्वारा सिंह शहीदा से निहंग सिखों का एक जत्था उत्तराखंड के लिए रवाना हुआ था, उनका कहना था कि वे गिरफ्तार साथियों की रिहाई और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर उत्तराखंड जा रहे हैं, जत्थे के रवाना होने की सूचना मिलने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी, देहरादून के कुल्हाल क्षेत्र सहित सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया, हालांकि वहां पर भी निहंग सिखों और पुलिस के बीच झड़प देखने को मिली, उत्तराखंड सीमा के पास पुलिस और निहंगों के बीच कई घंटों तक बातचीत चली। इस दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति भी बनी और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की गई। बाद में पुलिस अधिकारियों और सिख प्रतिनिधियों की बातचीत के बाद स्थिति शांत हुई, देर रात दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद जत्था वापस लौट गया।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

सिख संगठनों की मांग

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति सहित कई सिख संगठनों ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था तो कार्रवाई भी दोनों पक्षों के तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
फिलहाल उत्तराखंड और पंजाब दोनों राज्यों में प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े मामले की जांच जारी है। वहीं दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है, यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है और आने वाली जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की पूरी जिम्मेदारी किन परिस्थितियों में और किन लोगों पर तय होती है।

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