नई दिल्ली: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में पार्टी ने कांग्रेस के उस फैसले पर कड़ा विरोध जताया, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद ही गाने की बात कही गई है। बैठक में बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं वाला निंदा प्रस्ताव भी पारित किया।
‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों से हुई बैठक की शुरुआत
नई दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की पहली बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों के पूर्ण गायन के साथ हुई। बैठक में पार्टी की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसी दौरान कांग्रेस के ‘वंदे मातरम्’ को लेकर लिए गए फैसले को भी बीजेपी ने प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने का संकेत दिया।
कांग्रेस के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं का प्रस्ताव
बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं वाला कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने इस मुद्दे को देशभर में उठाने का फैसला किया है।
बीजेपी के मुताबिक, ‘वंदे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा ऐतिहासिक प्रतीक है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस का मौजूदा फैसला इसके ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्रीय भावना का अपमान है।
तुष्टीकरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान का मुद्दा
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के रुख की आलोचना की है।
बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले को राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान बताया। पार्टी का कहना है कि राजनीतिक फायदे या वोट बैंक की राजनीति के लिए ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।
‘वंदे मातरम्’ के सम्मान से समझौता नहीं
बीजेपी के प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक विरासत और सम्मान को किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
पार्टी ने महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को भी देशभर में प्रचारित करने का फैसला किया है, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और साम्राज्यवाद विरोधी चेतना से जुड़ा बताया था।
बीजेपी अब देशव्यापी अभियान के जरिए ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, महत्व और इसकी विरासत को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव का दिया हवाला
वहीं कांग्रेस अपने फैसले को ऐतिहासिक परंपरा से जोड़कर देख रही है। कांग्रेस कार्यसमिति ने तय किया है कि पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि यह फैसला 1937 में लिए गए ऐतिहासिक प्रस्ताव और उस समय अपनाई गई परंपरा के अनुरूप है।
अब देशभर में तेज हो सकता है सियासी विवाद
बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि वह ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे को सिर्फ पार्टी की बैठक तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी देशभर में प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान के जरिए कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है।
वहीं कांग्रेस अपने फैसले को ऐतिहासिक परंपरा और 1937 के प्रस्ताव से जोड़कर बचाव कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।
यानी राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़ा मुद्दा अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक बड़े सियासी विवाद में बदलता दिखाई दे रहा है।