पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन (SIR) की प्रक्रिया अब हिंसक विरोध का रूप ले चुकी है। नॉर्थ दिनाजपुर के चाकुलिया में स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई कि आक्रोशित भीड़ ने एक सरकारी दफ्तर को ही निशाना बना लिया। इस घटना ने राज्य में लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुरुवार को करीब 300 लोगों की भीड़ ने चाकुलिया स्थित BDO ऑफिस पर धावा बोल दिया। उपद्रवियों ने दफ्तर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। कंप्यूटर तोड़े गए, सरकारी फाइलें फाड़ी गईं, ज़रूरी दस्तावेज़ जलाए गए और फर्नीचर तहस-नहस कर दिया गया। स्थिति यहीं नहीं थमी; अंत में दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया। इस भीषण आगजनी और तोड़फोड़ में अनुमानित 20 लाख रुपये की सरकारी संपत्ति जलकर राख हो गई।
पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद हालात और बिगड़ गए, क्योंकि भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में चाकुलिया थाने के स्टेशन इंचार्ज घायल हो गए। दमकल की गाड़ियों को रोकने के लिए सड़कों पर टायर जलाकर रास्ते बंद कर दिए गए, जिससे इलाका घंटों तक धुएं और दहशत में डूबा रहा। इस मामले पर पुलिस अब तक 10 लोगों को हिरासत में ले चुकी है और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के Chief Election Officer ने बताया कि BDO और AERO ने लिखित शिकायत दी है कि सरकारी अधिकारी घायल हुए हैं, लेकिन उन्होंने SIR सुनवाई स्थलों पर कड़ी सुरक्षा का भरोसा भी दिया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत उन्हें बार-बार नोटिस भेजकर और सुनवाई के लिए बुलाकर जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। वहीं, इस बवाल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज़ हो गई है। BJP नेता सुकांत मजूमदार का आरोप है कि SIR का यह विरोध जानबूझकर मुस्लिम बहुल इलाकों में भड़काया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची के काम को रोका जा सके और राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव किया जा सके।
एक तरफ बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ED के बीच टकराव सुप्रीम कोर्ट में है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर हिंसा और आगजनी का माहौल है। सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र की प्रक्रिया डर और हिंसा के साए में चलेगी, या कानून और संवाद से स्थिति पर काबू पाया जा सकेगा। इस मामले से जुड़े हर अपडेट के लिए बने रहें।









