CJP के आंदोलन के समाप्त होने के बाद अब देश में सिर्फ आंदोलन की राजनीति पर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों के प्रशासनिक रवैये पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर प्रदेश पर गया, क्योंकि जिस समय दिल्ली में संसद मार्च को लेकर तनाव, कई राज्यों में प्रदर्शन और पुलिस के साथ टकराव की खबरें सामने आ रही थीं, उसी दौरान देश का सबसे बड़ा राज्य पूरी तरह शांत रहा। यही वजह है कि एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कानून-व्यवस्था मॉडल पर चर्चा तेज हो गई है।
उत्तर प्रदेश में पिछले आठ वर्षों से योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया है। सरकार का संदेश हमेशा साफ रहा है कि लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, सड़क जाम, अराजकता या कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। CJP आंदोलन के दौरान भी यही नीति जमीन पर दिखाई दी।
आंदोलन की शुरुआत से पहले ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गए थे। संवेदनशील जिलों की पहचान की गई, जिला प्रशासन को विशेष निर्देश दिए गए, खुफिया एजेंसियों को सक्रिय रखा गया और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों की लगातार निगरानी की गई। जहां भी किसी तरह की भीड़ जुटने या माहौल बिगड़ने की आशंका थी, वहां स्थानीय प्रशासन ने समय रहते संवाद और निगरानी के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखा। यही प्रशासनिक तैयारी सबसे बड़ा अंतर साबित हुई।
योगी सरकार की कार्यशैली का एक अहम पहलू यह भी रहा कि निर्णय लेने में देरी नहीं की गई। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश था कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो, लेकिन आम नागरिक को किसी तरह की असुविधा न हो। इसी वजह से पूरे प्रदेश में बाजार खुले रहे, परिवहन सामान्य रहा और रोजमर्रा की जिंदगी पर आंदोलन का कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अपराधियों और उपद्रवी तत्वों के खिलाफ हुई लगातार सख्त कार्रवाई ने भी एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव छोड़ा है। कानून तोड़ने की कीमत क्या हो सकती है, इसका संदेश पहले से ही स्थापित हो चुका है। यही कारण रहा कि आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर अराजकता की स्थिति पैदा नहीं हो सकी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह विषय सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया है कि क्या उत्तर प्रदेश का कानून-व्यवस्था मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय बन रहा है। समर्थक इसे योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक दक्षता, स्पष्ट नीति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम बताते हैं। उनका तर्क है कि सरकार ने विरोध के अधिकार और कानून के शासन के बीच संतुलन बनाकर दिखाया।
निस्संदेह, किसी भी लोकतंत्र में आंदोलन होते रहेंगे और उन पर राजनीतिक मतभेद भी रहेंगे। लेकिन CJP आंदोलन के बाद जिस तरह उत्तर प्रदेश की शांति और प्रशासनिक तैयारी चर्चा का विषय बनी है, उसने यह जरूर दिखाया कि सरकार यदि पहले से तैयारी करे, प्रशासन को स्पष्ट दिशा दे और कानून के पालन में कोई ढिलाई न बरते, तो बड़े से बड़ा आंदोलन भी बिना हिंसा और अव्यवस्था के बीच संभाला जा सकता है। यही कारण है कि CJP आंदोलन समाप्त होने के बाद सबसे अधिक चर्चा आंदोलन की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के ‘लॉ एंड ऑर्डर मॉडल’ की हो रही है।