यूट्यूब पर अपने बेबाक विश्लेषण और रिसर्च के लिए मशहूर कंटेंट क्रिएटर नितीश राजपूत आजकल कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाएं आयोजित करने वाली कंपनी ‘एडुक्विटी टेक्नोलॉजीज’ (Eduquity Technologies) ने उनके खिलाफ दिल्ली की अदालत में 2.5 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। यह पूरा विवाद एक वीडियो से शुरू हुआ जिसने SSC के टेंडर और परीक्षा कराने वाली कंपनियों के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे।
कंपनी ‘एडुक्विटी टेक्नोलॉजीज’ का आरोप है कि नितीश राजपूत ने अपने वीडियो के माध्यम से उनकी छवि खराब करने की कोशिश की है और भ्रामक व तथ्यों से परे जानकारी फैलाई है। कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की है कि निती: राजपूत को हर्जाने के तौर पर 2.5 करोड़ रुपये देने चाहिए और विवादित वीडियो को यूट्यूब से तुरंत हटाया जाना चाहिए। कंपनी का तर्क है कि इस वीडियो से उनकी साख को भारी नुकसान पहुंचा है और इससे सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
करीब 80 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स वाले नितीश राजपूत इस मामले पर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने वीडियो हटाने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वीडियो में प्रस्तुत सभी डेटा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों पर आधारित थे। नितीश राजपूत का तर्क है कि उनका उद्देश्य केवल लाखों छात्रों तक सही और पारदर्शी जानकारी पहुंचाना था, और छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करना एक जागरूक नागरिक के तौर पर उनका अधिकार है।
नितीश राजपूत देश के उन चुनिंदा यूट्यूबर्स में से हैं जो जटिल सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर ‘एक्सप्लेनर’ वीडियो बनाने के लिए जाने जाते हैं। यह मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है, जहां यह तय होगा कि क्या एक यूट्यूबर का विश्लेषण मानहानि के दायरे में आता है या यह अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है।
कोर्ट के इस फैसले पर अब देश भर के लाखों छात्र और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला भारत में डिजिटल मीडिया की जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को परिभाषित कर सकता है।









