हिमालय के ग्लेशियरों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, 2100 तक 80 फीसदी हिस्सा पिघलने की आशंका

जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर बेहद तेजी से पिघल रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यही रफ्तार रही तो सदी के अंत तक इनका बड़ा हिस्सा खत्म हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया भर के पर्यावरण पर साफ दिखाई दे रहा है। इसका सबसे खतरनाक प्रभाव हिमालय के ग्लेशियरों पर पड़ रहा है, जो बहुत तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर तापमान बढ़ने की मौजूदा रफ्तार पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

अनुमान जताया गया है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो साल 2100 तक हिमालय अपने कुल ग्लेशियरों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा खो सकता है। ग्लेशियरों के इस तरह लगातार पिघलने से न केवल समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए पीने के पानी और कृषि का संकट भी गहरा सकता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बदलता मौसम और बढ़ता तापमान इस संकट को और ज्यादा बढ़ावा दे रहा है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि प्रकृति को इस बड़े नुकसान से बचाया जा सके।

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