करीब डेढ़ महीने से 10 भारतीय नाविक ईरान की जेल में बंद हैं, जबकि जहाज पर मौजूद बाकी 8 क्रू सदस्य सीमित भोजन पर गुजारा कर रहे हैं। 8 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में टैंकर जब्त होने के बाद शुरू हुआ यह संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। परिजनों ने अब न्याय और सुरक्षित वापसी की गुहार लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को तत्काल स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
ईरान में फंसे भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए यह समय किसी बुरे सपने से कम नहीं है। टैंकर ‘वैलियंट रो’ के कमांडिंग कैप्टन विजय कुमार ने 8 दिसंबर की रात को ही अपने भाई, कैप्टन विनोद परमार को फोन पर सूचित किया था कि उनका जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में होने के बावजूद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स उनका पीछा कर रहे हैं, जिसके बाद फोन कट गया। परिजनों का आरोप है कि ईरानी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों को दरकिनार करते हुए टैंकर को जब्त कर लिया। जहाज पर कुल 18 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल थे।
ईरान का आरोप बनाम परिजनों का दावा: ईरान ने जहाज पर 60 लाख लीटर डीज़ल की तस्करी का आरोप लगाया है, लेकिन कैप्टन विनोद परमार और अन्य परिजन इस दावे को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि टैंकर में लो-सल्फर फ्यूल ऑयल था और ईरानी अधिकारियों ने सैंपल एनालिसिस रिपोर्ट को भी अनदेखा कर दिया।
क्रू के साथ दुर्व्यवहार: परिजनों ने आरोप लगाया है कि ईरानी नौसेना की फायरिंग से जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू सदस्य घायल हुए। जहाज पर चढ़ने के बाद सशस्त्र ईरानी कर्मियों ने क्रू सदस्यों के साथ मारपीट की, उनके मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए। सभी 18 लोगों को एक ही कमरे में जबरन बंद रखा गया था और बाथरूम जाने के लिए भी पहरेदार साथ रहते थे।
जेल में 10 नाविक: 6 जनवरी 2026 को हालात तब और बिगड़ गए जब 18 में से 10 नाविकों को, जिनमें चीफ ऑफिसर अनिल सिंह और कई जूनियर इंजीनियर शामिल हैं, बयान दर्ज करने के बहाने जहाज़ से ले जाया गया और उन्हें बंदर अब्बास की जेल भेज दिया गया। चीफ ऑफिसर की पत्नी को महज़ एक मिनट के लिए फोन कर झूठे स्मगलिंग आरोपों में हिरासत की जानकारी दी गई।
जेल भेजे गए 10 नाविकों से तब से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। जहाज़ पर बचे आठ नाविकों की हालत भी चिंताजनक है, जिन्हें केवल पानी और बेहद सीमित खाना (चावल-दाल) दिया जा रहा है, जिससे राशन खत्म होने का डर है। भारत और ईरान दोनों मैरिटाइम लेबर कन्वेंशन 2006 के पक्षकार हैं, लेकिन परिजनों का आरोप है कि ईरान ने न तो कोई औपचारिक हिरासत आदेश जारी किया है और न ही जब्ती का कोई कानूनी कारण बताया है। इन सबके बीच, ईरान में पिछले 15-16 दिनों से जारी हिंसक प्रदर्शनों और संचार बाधित होने के कारण परिवारों की चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहल पर टिकी हैं कि क्या वह इन अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित और जल्द वापस ला पाती है।









