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माघ मेले में दिखा आस्था और राष्ट्रभक्ति का संगम: हर-हर गंगे के साथ गूंजा ‘भारत माता की जय’

माघ मेले के शिविरों में फहराया गया तिरंगा, दंडी स्वामियों ने मनाया गणतंत्र दिवस

त्रिवेणी तट पर आयोजित होने वाले माघ मेले को आमतौर पर भगवत प्रेम और साधना के केंद्र के रूप में जाना जाता है। लेकिन हाल ही में संपन्न हुए इस महा समागम में भक्ति और राष्ट्रप्रेम का एक अनोखा और प्रेरणादायक संगम देखने को मिला। पूरा मेला क्षेत्र जहां सनातन धर्म के ध्वजों से भरा था, वहीं 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हर शिविर में तिरंगा शान से लहराया गया, जिससे यह साबित हुआ कि राष्ट्रधर्म ही सर्वोच्च धर्म है।

संगम किनारे आस्था और अध्यात्म के केंद्र माघ मेले में, साधु-संतों और कल्पवासियों ने पूरे उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाया। मेला क्षेत्र में लगे 56 हजार से अधिक अस्थाई शिविरों को सनातन ध्वजा के साथ भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के रंगों से सजाया गया। ‘हर-हर गंगे’ के पारंपरिक जयघोष में ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष भी शामिल हो गया। दंडी स्वामी नगर, आचार्य बाड़ा, खाक चौक और यहां तक कि सनातनी किन्नर अखाड़े के शिविरों में भी सामूहिक राष्ट्रगान गाया गया और देश की एकता-अखंडता के लिए सामूहिक संकल्प लिए गए।

इस दौरान माघ मेला क्षेत्र के दंडी स्वामी संतों के नागेश्वर धाम शिविर में अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज ने ध्वजारोहण किया। साधु-संतों को संबोधित करते हुए स्वामी महेशाश्रम महाराज ने राष्ट्रधर्म और अध्यात्म के अटूट संबंध पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि, “राष्ट्रध्वज और धर्मध्वज दोनों का अटूट संबंध है। राष्ट्रध्वज हमारे दिल में राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए काम करने के लिए प्रेरित करता है, जबकि धर्मध्वज आत्म बल और सनातन को जागृत करता है।”

स्वामी महेशाश्रम महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे सनातन की रक्षा के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सनातन और संविधान दोनों ही व्यवस्था की मांग करते हैं, और इसकी रक्षा के लिए योगी जी के प्रयासों को सभी संतों को निरंतर मजबूत करते रहने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रधर्म और सनातन धर्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और इसकी मजबूती के लिए पूरे संत समाज को एकजुट रहने की जरूरत है।

माघ मेले का यह भव्य आयोजन यह संदेश देता है कि राष्ट्रभक्ति और आस्था एक दूसरे के पूरक हैं, और सनातन समाज राष्ट्र की संप्रभुता के लिए हमेशा समर्पित रहा है।

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