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भारतीय रुपये ने छुआ अब तक का सबसे निचला स्तर, जानिए 1 डॉलर की कीमत 92 रुपये क्यों हुई?

भारतीय रुपये ने छुआ अब तक का सबसे निचला स्तर

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने इतिहास के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है। रुपया पहली बार 92.00 प्रति डॉलर के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है, जिससे आयात महंगा होने और देश में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

हालिया कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.00 के सर्वकालिक निचले स्तर तक फिसल गया। इंटरबैंक बाजार में रुपया 91.95 पर खुला, लेकिन लगातार बढ़ती डॉलर की मजबूत मांग और वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल के कारण यह जल्द ही रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया। यह गिरावट पिछले बंद स्तर से भी नीचे है, क्योंकि इससे ठीक पहले रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.99 पर बंद हुआ था, जो उसका अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर था। इस वर्ष अब तक रुपये में लगभग 2% की कमजोरी दर्ज की जा चुकी है।

फॉरेक्स बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति में लिए गए फैसलों के बाद डॉलर इंडेक्स में व्यापक मजबूती आई है।

वैश्विक अनिश्चितता के कारण अन्य एशियाई मुद्राओं में आई कमजोरी का असर भारतीय रुपये पर भी साफ दिखाई दे रहा है। घरेलू स्तर पर आयातकों द्वारा डॉलर की लगातार बढ़ती मांग।

आर्थिक जानकारों के मुताबिक, रुपये में गिरावट का एक पुराना संदर्भ भी मौजूद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के माल निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से रुपया लगभग 5% तक गिर चुका है। रुपये के लगातार कमजोर होने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है, जिससे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं, जिसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मांग कम नहीं होती, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा। आरबीआई और केंद्र सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं ताकि बाजार को स्थिर किया जा सके और महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सके।