भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में हाल ही में तनाव बढ़ गया है। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यूनुस सरकार ने करीब 960 करोड़ रुपये के एक महत्वपूर्ण भारतीय आर्थिक प्रोजेक्ट को अचानक रद्द कर दिया है।
यह मामला बांग्लादेश के चटगांव के मीरसराय क्षेत्र से जुड़ा है। यहां 1000 एकड़ जमीन पर एक इंडियन इकोनॉमिक जोन (Indian Economic Zone) स्थापित किया जाना था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बांग्लादेश में रोजगार बढ़ाना, उद्योग लाना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना था। टाटा (Tata) और अडानी (Adani) जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों ने भी यहां फैक्ट्रियां लगाने में दिलचस्पी दिखाई थी। भारत ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए आसान शर्तों पर 115 मिलियन डॉलर (करीब 960 करोड़ रुपये) का कर्ज भी मंजूर किया था।
हाल ही में ढाका में हुई बांग्लादेश आर्थिक क्षेत्र प्राधिकरण की बैठक में यूनुस सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को रद्द करने का फैसला लिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब वहां आर्थिक क्षेत्र नहीं बनाया जाएगा, बल्कि इसकी जगह एक डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्क (Defence Industrial Park) स्थापित किया जाएगा। इस पार्क में हथियार, गोला-बारूद और टैंक से जुड़े उपकरणों का निर्माण किया जाएगा। बांग्लादेश सरकार का तर्क है कि मौजूदा हालात में विदेशी निवेश से कहीं अधिक जरूरी यह है कि देश हथियार बनाने में आत्मनिर्भर बने।
यह फैसला भारत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जब भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत भरोसा और सहयोग का माहौल था। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरिम सरकार के इस सख्त कदम को भारत के साथ उन मजबूत आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सभी की निगाहें बांग्लादेश में चुनाव के बाद बनने वाली नई स्थायी सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह भारत के साथ संबंधों को फिर से पटरी पर लाएगी, या यह तनाव आने वाले समय में और बढ़ जाएगा।









