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एलन मस्क का बड़ा ऐलान: अब मंगल से पहले चांद पर बसेगा इंसानों का शहर, SpaceX ने बदली टाइमलाइन

एलन मस्क का बड़ा ऐलान

दुनिया के सबसे बड़े इनोवेटर और दिग्गज कारोबारी एलन मस्क (Elon Musk) ने एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में हलचल मचा दी है। मस्क ने अपने महत्वाकांक्षी मिशन की टाइमलाइन में बड़ा बदलाव करते हुए अब यह साफ किया है कि मंगल ग्रह से पहले उनकी कंपनी SpaceX चांद पर इंसानों के रहने लायक एक आत्मनिर्भर शहर बसाएगी। यह घोषणा अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक बड़ा मोड़ है, जिसे मस्क 10 साल से भी कम समय में पूरा करने का दावा कर रहे हैं।

एलन मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि SpaceX अब चंद्रमा पर एक ऐसा शहर बनाना चाहती है, जो पूरी तरह आत्मनिर्भर हो और अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सके।

मस्क के मुताबिक, चंद्रमा पर ‘सेल्फ-सस्टेनिंग’ शहर 10 साल से भी कम समय में तैयार किया जा सकता है, जबकि मंगल ग्रह पर ऐसा शहर बसाने में 20 साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंगल मिशन की योजना जारी रहेगी, लेकिन उसकी शुरुआत लगभग 5 से 7 साल बाद होगी। चंद्रमा को प्राथमिकता देने का मुख्य कारण यह है कि पृथ्वी से चंद्रमा तक पहुंचने में सिर्फ करीब 3 दिन लगते हैं, वहीं मंगल तक जाने में 6 से 9 महीने का समय लगता है।

स्टारशिप और नासा की साझेदारी:

इस मिशन में SpaceX का सबसे बड़ा और शक्तिशाली रीयूजेबल रॉकेट ‘स्टारशिप’ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, SpaceX मार्च 2027 तक चंद्रमा पर बिना इंसानों वाली (अनक्रूड) लैंडिंग की तैयारी कर रहा है।

स्टारशिप को NASA के प्रतिष्ठित ‘आर्टेमिस प्रोग्राम’ के तहत लूनर लैंडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा। नासा ने स्पेसएक्स को चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने का कॉन्ट्रैक्ट दिया हुआ है।

मस्क की योजना के तहत, चंद्रमा पर मौजूद बर्फ का उपयोग ऑक्सीजन और हाइड्रोजन (भविष्य के लिए ईंधन) बनाने के लिए किया जाएगा। शुरुआत में स्टारशिप को अस्थायी घर और बेस के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके बाद रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग के माध्यम से धीरे-धीरे स्थायी शहर का निर्माण किया जाएगा।

एलन मस्क का मानना है कि चंद्रमा पर बेस बनाकर इंसान ‘मल्टी-प्लैनेटरी स्पीशीज’ बन सकता है, जिससे भविष्य में पृथ्वी पर संकट आने पर मानवता सुरक्षित रह सके। अब देखना यह है कि क्या अगले दशक में स्पेसएक्स अपने इस विशाल सपने को हकीकत में बदल पाता है या नहीं।

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