गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का सरकार को अल्टीमेटम, 12 मार्च को लखनऊ में शंखनाद

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज 12 मार्च को ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद होने जा रहा है। यह घोषणा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने की है, जिन्होंने गो माता को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने और प्रदेश में बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर राज्य सरकार को 40 दिनों की समयसीमा दी थी, जो आज समाप्त हो रही है। यदि सरकार इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो एक बड़े धार्मिक आंदोलन की रूपरेखा तैयार है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में वाराणसी स्थित श्रीविद्या मठ में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया था कि चेतावनी के 30 दिन बीत चुके हैं और अब कुछ ही दिन शेष थे। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार शेष अवधि में कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आगे की रणनीति लागू की जाएगी, और इससे बनने वाली किसी भी परिस्थिति की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की होगी। इस आंदोलन के माध्यम से सनातन धर्म की भावना और गौ संरक्षण की महत्वपूर्ण मांग को उठाया जा रहा है।

इस ‘धर्म युद्ध’ की शुरुआत 6 मार्च को शंकराचार्य घाट पर वीर शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर गंगा पूजन के साथ संकल्प लेकर हुई थी। इसके बाद, 7 मार्च को श्रीविद्या मठ से संकटमोचन मंदिर में प्रार्थना के बाद यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हुई, जिसमें जौनपुर, सुलतानपुर और रायबरेली में जनसभाएं आयोजित की गईं। यह यात्रा 8 मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज और उन्नाव से, तथा 9 मार्च को उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य से गुजरी। 10 मार्च को सिधौली और इटौंजा होते हुए यह काफिला लखनऊ पहुंचा। 11 मार्च को शीतलाअष्टमी के अवसर पर कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, आशियाना में एक विद्वत सभा भी प्रस्तावित थी, जिसमें आंदोलन की अंतिम रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बार-बार यह दोहराया है कि यह अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसे समाज के विभिन्न वर्गों से व्यापक समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने सभी लोगों से इस महत्वपूर्ण आंदोलन के दौरान संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है, ताकि यह धर्म युद्ध अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सके और सरकार पर उनकी मांगों को मानने का दबाव बना सके।

अब देखना यह होगा कि आज 12 मार्च को सरकार का रुख क्या रहता है और इस ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का अगला कदम क्या होगा। यह आंदोलन गौ संरक्षण के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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