धर्म और आस्था की नगरी वाराणसी में होली के अवसर पर श्री विद्या मठ में भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंगों के इस विशेष उत्सव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संतों और श्रद्धालुओं के साथ रंगोत्सव मनाते हुए सभी पर आशीर्वाद की वर्षा की।
होली के पावन अवसर पर मठ परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जगद्गुरु शंकराचार्य ने उपस्थित संतों और भक्तों को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और प्रेम, सौहार्द व आध्यात्मिक एकता का संदेश दिया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं है, बल्कि यह मन के भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष जैसे विकारों को त्यागकर प्रेम और भाईचारे से जीवन को रंगने का संदेश देती है। जब संत और श्रद्धालु एक साथ ईश्वर भक्ति में लीन होकर उत्सव मनाते हैं, तब वह क्षण दिव्यता से भर जाता है।
कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने भक्ति गीतों और फाग की धुनों पर झूमते हुए एक-दूसरे को गुलाल लगाया। मठ परिसर में प्रसाद वितरण भी किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।
होली के इस पावन अवसर पर काशी में आयोजित यह रंगोत्सव श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया, जहां रंग, भक्ति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिला।









