भारतीय रेलवे में पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले ट्रैक मेंटेनर्स और इंजीनियरिंग विभाग के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। मानसून और भारी बारिश के दौरान संवेदनशील स्थानों पर नियमित ड्यूटी के बाद अतिरिक्त काम करने वाले कर्मचारियों को अब समयोपरि भत्ता (ओवरटाइम) दिया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत ‘रोड अंडर ब्रिज’ (आरयूबी) जैसे संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर्मचारी यदि अपनी आठ घंटे की नियमित ड्यूटी के बाद चार घंटे अतिरिक्त सेवा देते हैं तो उन्हें इसका भुगतान ओवरटाइम के रूप में किया जाएगा। लंबे समय से कर्मचारी इस मांग को उठा रहे थे कि मानसून के दौरान अतिरिक्त काम के बावजूद उन्हें स्पष्ट भुगतान नहीं मिल पाता था।
रेलवे सूत्रों के अनुसार इस पहल की शुरुआत उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल से हुई है। यहां के मॉडल को सफल मानते हुए अब इसे देश के सभी 17 रेलवे जोन में लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल सहित अन्य मंडलों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बताया जाता है कि इस फैसले के पीछे रेलवे यूनियनों की लंबे समय से चली आ रही मांग भी अहम रही है। मेंस यूनियन और इंप्लाइज संघ ने कई बैठकों में यह मुद्दा उठाया था कि बारिश के मौसम में रेल सुरक्षा बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को अपनी तय शिफ्ट से कहीं अधिक समय तक काम करना पड़ता है। इसके बाद जयपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल अभियंता ने अधीनस्थ अधिकारियों को नियमों के तहत ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए।
दरअसल मानसून के समय आरयूबी और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या के कारण रेल संचालन प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में ट्रैक मेंटेनर्स अपनी नियमित ड्यूटी के बाद भी अतिरिक्त समय तक पटरियों और अंडरपास से पानी की निकासी सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं। अब रेलवे प्रशासन ने इस अतिरिक्त सेवा को औपचारिक रूप से ओवरटाइम की श्रेणी में शामिल करने का निर्णय लिया है।
आंकड़ों के मुताबिक भारतीय रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में वर्तमान में करीब 3 लाख 20 हजार ट्रैक मेंटेनर्स कार्यरत हैं। यह रेलवे का सबसे बड़ा कार्यबल है और सीधे तौर पर ट्रैक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। नए फैसले से देशभर के करीब तीन लाख से अधिक कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
रेलवे प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त कार्य का भुगतान पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। कर्मचारियों द्वारा किए गए अतिरिक्त घंटों का रिकॉर्ड मस्टर रोल में दर्ज किया जाएगा और उसी आधार पर भत्ते की गणना कर राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
गौरतलब है कि मानसून के दौरान रेलवे विशेष तैयारियां करता है। औसतन एक रेल मंडल में 2,500 से 3,000 कर्मचारी आरयूबी और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी के लिए तैनात रहते हैं। देशभर में इनकी संख्या करीब डेढ़ से दो लाख तक पहुंच जाती है, जिन्हें अब अतिरिक्त ड्यूटी के बदले ओवरटाइम भत्ता मिलेगा।
रेलवे बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था को देशभर में लागू करने का उद्देश्य मानसून के दौरान कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना और उनकी सेवाओं का सम्मान करना है।









