राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च से 21 मार्च तक मथुरा-वृंदावन के तीन दिवसीय आध्यात्मिक दौरे पर पहुंच रही हैं। इस दौरान वे प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगी और कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी। श्रीकृष्ण की लीला भूमि मथुरा-वृंदावन सदियों से भक्ति का केंद्र रही है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं।
इस्कॉन मंदिर से होगी राष्ट्रपति के दौरे की शुरुआत
राष्ट्रपति अपने दौरे की शुरुआत वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर (श्री कृष्ण-बलराम मंदिर) से करेंगी। 1975 में ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा स्थापित यह मंदिर आधुनिक और भव्य संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यहां राष्ट्रपति प्रभुपाद समाधि के दर्शन करेंगी और गौ पूजा में भी शामिल होंगी।
प्रेम मंदिर की भव्यता भी देखेंगी राष्ट्रपति
इसके बाद राष्ट्रपति प्रेम मंदिर जाएंगी, जो अपनी शानदार वास्तुकला और रोशनी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर में राधा-कृष्ण की लीलाओं को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। यहां वे सीता-राम मंदिर के भी दर्शन करेंगी।
दौरे के अंतिम दिन राष्ट्रपति गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर जाएंगी। मान्यता है कि यहां भगवान कृष्ण ने गोपियों से दान लिया था। यहां गिरिराज जी के दर्शन के बाद राष्ट्रपति सप्तकोसीय परिक्रमा भी करेंगी, जो ब्रज की सबसे पवित्र परंपराओं में से एक मानी जाती है।
सप्तकोसीय परिक्रमा का धार्मिक महत्व
गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा करीब 21 किलोमीटर लंबी होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी, इसलिए इसकी परिक्रमा करना भगवान की पूजा के समान माना जाता है।
बंदरों से सुरक्षा बना चर्चा का विषय
राष्ट्रपति के दौरे से पहले एक अनोखी खबर सामने आई थी कि वृंदावन में ‘चश्मा चोर’ बंदरों से बचाव के लिए कटआउट लगाए गए हैं। ये बंदर अक्सर लोगों का चश्मा छीन लेते हैं और बदले में खाने-पीने की चीजों की मांग करते हैं। प्रशासन इस दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचना चाहता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर
जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मजेदार प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। किसी ने सिक्योरिटी पर सवाल उठाए तो किसी ने मजाक में कहा कि बंदरों को पता चल गया तो उनकी मांग और बढ़ जाएगी। यह मामला अब भी चर्चा का विषय बन गया है।









