केरल की राजनीति में इस वक्त बड़ी खबर आई है। कांग्रेस ने वीडी सतीशन को केरल का नया मुख्यमंत्री चुना है। लंबे समय से चल रहे सस्पेंस के बाद, कांग्रेस आलाकमान ने आखिरकार सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। अब सवाल यह उठता है कि सतीशन में ऐसा क्या खास है कि उन्होंने बड़े-बड़े नेताओं को पीछे छोड़ दिया और पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया।
सबसे पहले तो यह जानिए कि सतीशन के नाम पर सिर्फ दिल्ली के नेताओं की रजामंदी नहीं थी, बल्कि केरल के कार्यकर्ताओं ने भी उनका समर्थन किया। केरल के विभिन्न हिस्सों में सतीशन के समर्थन में पोस्टर लगे थे, जो यह दर्शाता है कि कार्यकर्ता क्या चाहते हैं। केसी वेणुगोपाल का नाम भी चर्चा में था, लेकिन केरल के बड़े नेताओं जैसे एके एंटनी और के. मुरलीधरन ने सतीशन का समर्थन किया और यही समर्थन उन्हें सबसे आगे ले आया।
सतीशन के बारे में कुछ खास बातें यह हैं कि वह 2001 से लगातार परवूर सीट से विधायक रहे हैं। इसका मतलब यह है कि वह अपनी जनता से जुड़े हुए हैं और पिछले 25 सालों से अपनी पहचान बनाए हुए हैं। 2021 में जब उन्हें विपक्ष का नेता बनाया गया था, तब से यह माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रही है।
सतीशन ने विधानसभा में लेफ्ट सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेरा और जनता की आवाज उठाई। इस बार के चुनाव में भी उनकी रणनीति से कांग्रेस को जीत मिली। पार्टी आलाकमान को लगा कि अगर केरल में संगठन को मजबूत करना है, तो सतीशन सबसे उपयुक्त नेता हैं क्योंकि उनकी पकड़ संगठन में गहरी है और वह सभी को साथ लेकर चलते हैं।
कई दिनों की बैठकों और नवनिर्वाचित विधायकों की राय जानने के बाद, गुरुवार को सतीशन के नाम का आधिकारिक ऐलान किया गया। जैसे ही यह खबर आई, केरल में उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने एक ऐसे नेता को चुना है जो साफ-सुथरी छवि वाला है और जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए अपनी काबिलियत साबित की है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सतीशन केरल के विकास में कितनी सफलता प्राप्त करते हैं।
