भारत के आर्थिक दांव को मात देने की तैयारी? बांग्लादेश ने जापान-अमेरिका से किए दो बड़े व्यापार समझौते

चुनाव से पहले यूनुस सरकार का बड़ा दांव
चुनाव से पहले यूनुस सरकार का बड़ा दांव

क्या बांग्लादेश ने चुनाव से पहले अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है? हाल ही में, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने दुनिया की दो बड़ी आर्थिक ताकतों—जापान और अमेरिका—के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी बाजार में भारतीय टेक्सटाइल को मिली बड़ी छूट के कारण बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर संकट मंडरा रहा था। यूनुस सरकार की यह नई आर्थिक रणनीति न सिर्फ निर्यात को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत के बढ़ते आर्थिक प्रभाव का मुकाबला करने की भी कोशिश है।

पिछले हफ्ते बांग्लादेश ने जापान के साथ अपना पहला आर्थिक भागीदारी समझौता (EPA) साइन किया। इस समझौते के तहत बांग्लादेश के निर्यातकों को लगभग 97 प्रतिशत उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभार्थी रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर होगा, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यूनुस सरकार इस डील के माध्यम से जापानी कंपनियों को ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए भी आकर्षित करना चाहती है, ताकि औद्योगिक विकास को गति मिल सके। यह समझौता इसलिए भी अहम है क्योंकि बांग्लादेश जल्द ही कम विकसित देशों (LDC) की श्रेणी से बाहर होने वाला है।

वहीं, अंतरिम सरकार 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से ठीक पहले अमेरिका के साथ भी एक बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रही है। इस डील का मुख्य फोकस कपड़ा उद्योग पर है। समझौते के तहत, अमेरिकी कॉटन से बने गारमेंट्स पर टैक्स में भारी छूट मिलेगी, और रेसिप्रोकल टैरिफ को और कम किया जाएगा। बांग्लादेश के कुल निर्यात का लगभग 95% हिस्सा अमेरिका को जाता है, जिसमें कपड़े शामिल हैं। यह रणनीति भारतीय टेक्सटाइल को अमेरिका में मिली बड़ी छूट के बाद पैदा हुए खतरे का सीधा जवाब मानी जा रही है।

गौरतलब है कि पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बांग्लादेशी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बातचीत के जरिए कम किया गया। इसके बदले में बांग्लादेश ने अमेरिका से अधिक मात्रा में गेहूं, कपास, गैस और विमान खरीदने का वादा किया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन बनाए रखा जा सके।

चुनाव से ठीक पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इन समझौतों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत सहारा देने की पूरी कोशिश की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि देश में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच, चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार इन आर्थिक डीलों को किस दिशा में ले जाती है और वे बांग्लादेश के लिए कितनी सफल साबित होती हैं।

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