परिसीमन बिल के लिए NDA को चाहिए दो-तिहाई बहुमत, शरद पवार के समर्थन से बदल सकते हैं संसद के समीकरण।
नई दिल्ली: संसद के आगामी मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार संविधान संशोधन से जुड़े कई अहम विधेयक पेश कर सकती है. इनमें परिसीमन (Delimitation) विधेयक और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे प्रस्ताव प्रमुख हैं. चूंकि ये संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक हैं, इसलिए इन्हें पारित कराने के लिए साधारण बहुमत नहीं, बल्कि विशेष बहुमत की जरूरत होगी. ऐसे में लोकसभा का मौजूदा संख्या बल और बदलते राजनीतिक समीकरण सबसे अहम भूमिका निभाएंगे.
संविधान संशोधन के लिए क्यों जरूरी है दो-तिहाई बहुमत?
संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित कराना अनिवार्य होता है. इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक सांसदों का समर्थन और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है. यही वजह है कि सरकार के लिए हर सांसद का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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अप्रैल में क्यों नहीं पास हो पाया था विधेयक?
इसी साल अप्रैल में महिलाओं को आरक्षण और लोकसभा-विधानसभा सीटों के विस्तार से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था. उस समय सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष को 230 वोट मिले. कुल 528 सांसदों ने मतदान किया था और विधेयक पारित होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी. सरकार आवश्यक संख्या से 54 वोट पीछे रह गई थी.
तीन महीनों में कैसे बदला संसद का गणित?
अप्रैल के बाद कई राजनीतिक घटनाक्रमों ने लोकसभा का समीकरण बदल दिया है. अलग-अलग दलों में टूट, नए राजनीतिक गठजोड़ और कुछ सांसदों के पाला बदलने से सत्ता पक्ष पहले की तुलना में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है. यही कारण है कि मॉनसून सत्र से पहले संख्या बल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
टीएमसी और शिवसेना में टूट से NDA को फायदा
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के अलग होने और उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने से एनडीए की ताकत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि इन सभी घटनाक्रमों की संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी.
क्या शरद पवार का समर्थन बदल सकता है खेल?
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने संकेत दिया है कि यदि परिसीमन विधेयक में लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान शामिल किया जाता है तो उनकी पार्टी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपना सकती है. हालांकि पार्टी ने अभी तक सरकार को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा नहीं की है.
लोकसभा का ताजा नंबर गेम क्या कहता है?
लोकसभा की कुल 543 सीटों में फिलहाल कुछ सीटें रिक्त हैं, जिससे प्रभावी सदस्य संख्या कम हो जाती है. ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा भी मतदान के समय उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों की संख्या पर निर्भर करेगा. राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक एनडीए के पास अपने सहयोगियों के साथ मजबूत संख्या है, लेकिन संविधान संशोधन जैसे विधेयकों के लिए उसे कुछ अन्य दलों या निर्दलीय सांसदों के समर्थन की भी जरूरत पड़ सकती है.
मॉनसून सत्र में सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा
परिसीमन और ‘एक देश, एक चुनाव‘ जैसे विधेयकों पर होने वाली बहस और मतदान आगामी मॉनसून सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा माना जा रहा है. सरकार जहां आवश्यक समर्थन जुटाने में लगी है, वहीं विपक्ष भी साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का नंबर गेम तय करेगा कि सरकार अपने सबसे बड़े संवैधानिक एजेंडे को आगे बढ़ा पाती है या नहीं.


