ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. सोमवार (13 जुलाई) को हुए इस हमले में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया.
IRGC का दावा- अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाते हुए कई रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया है. ईरानी दावे के अनुसार, जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस में मौजूद फ्यूल स्टोरेज और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन में अमेरिकी ड्रोन कमांड सेंटर पर भी हमला किया गया. ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तो उसके अन्य ठिकानों पर भी हमले जारी रहेंगे. हमलों के बाद जॉर्डन और कुवैत दोनों ने अपनी वायु सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी. जॉर्डन ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया.वहीं कुवैत की सेना ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके में हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
300 से ज्यादा हमलों का दावा, कई ठिकानों पर नुकसान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने हाल के दिनों में ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है. बताया जा रहा है कि सिर्फ एक रात में करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि तीन दिनों में कुल हमलों की संख्या 300 से अधिक पहुंच गई. दूसरी ओर, ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुवैत के उत्तरी सीमा क्षेत्र के कुछ सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचने की खबर है. इसके अलावा एक ड्रोन हमले में कुवैत ऑयल कंपनी के ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को भी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक कर्मचारी घायल होने की जानकारी सामने आई है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, दुनिया की नजर हालात पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है. बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रही, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर है और दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।


