भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस में चन्नी-वडिंग विवाद सुलझाया, टिकट बंटवारे में गुट को भरोसा दिया।
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी के बीच शनिवार को चंडीगढ़ में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। काफी लंबे इंतजार के बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके नाराज गुट के नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक के बाद भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के नेतृत्व में कोई झगड़ा नहीं है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर पहले ही कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि यह कोई गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं है और इस बार भी वे अपने फैसले पर अडिग रहे। भूपेश बघेल ने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को उनके पद से हटाने पर कोई चर्चा नहीं हुई है और वे अपने पद पर बने रहेंगे। हालांकि, उन्होंने चन्नी गुट को शांत करने के लिए एक बड़ा भरोसा देते हुए कहा कि जो भी नेता काबिल होगा और जिसमें चुनाव जीतने की क्षमता होगी, उसे टिकट वितरण में निश्चित रूप से मौका दिया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने प्रतावित हैं, जिसके कारण पार्टी के भीतर वर्चस्व की जंग तेज हो गई है।
राणा गुरजीत सिंह के घर हुई 80 मिनट की बैठक और चन्नी बनाम वडिंग विवाद
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से ‘चन्नी बनाम वडिंग’ गुट के बीच वर्चस्व की सीधी लड़ाई चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक वरिष्ठ नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटवाना चाहते थे। इसी सिलसिले में अपनी बात रखने के लिए चन्नी और उनके करीबी नेता चंडीगढ़ में स्थित कांग्रेस नेता राणा गुरजीत सिंह के घर पहुंचे, जहां भूपेश बघेल के साथ करीब 80 मिनट तक गहन चर्चा हुई। इस बैठक में अमरिंदर सिंह राजा वडिंग खुद मौजूद नहीं थे। दरअसल, 1 जुलाई को ही कांग्रेस आलाकमान ने घोषणा की थी कि राजा वडिंग पंजाब यूनिट के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि जालंधर के सांसद चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया जाएगा। इस फैसले से नाराज चन्नी शुरुआत में बघेल से मिलने नहीं गए थे और उनके समर्थक भी पार्टी की सांगठनिक बैठकों से दूर रहे थे, लेकिन शनिवार को आखिरकार उन्होंने प्रभारी के सामने कार्यकर्ताओं की भावनाएं रखने का फैसला किया।
बैठक में भले नहीं थे वडिंग, लेकिन कार चलाकर बघेल को छोड़ा एयरपोर्ट
राणा गुरजीत सिंह के घर हुई इस मैराथन बैठक के तुरंत बाद भूपेश बघेल रायपुर लौटने के लिए वहां से रवाना हो गए। हालांकि, इस विवाद के बीच एक दिलचस्प और अनोखा नजारा तब देखने को मिला जब राजा वडिंग बैठक में शामिल न होने के बावजूद, बघेल के एयरपोर्ट जाने वाले रास्ते में उनसे मिले। इस दौरान एकजुटता का संदेश देने के लिए राजा वडिंग ने खुद भूपेश बघेल की कार की ड्राइविंग सीट संभाली और उन्हें खुद कार चलाकर एयरपोर्ट तक छोड़ने गए। इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर चन्नी ने भी एकजुटता की बात करते हुए लिखा था कि वे पंजाब के भले और कांग्रेस कार्यकर्ताओं व जनता की भावनाओं को प्रभारी के सामने रखने के लिए पूरी तरह एकजुट हैं [cite: शुक्रवार शाम को एक X पोस्ट में चन्नी ने लिखा, “पंजाब के लिए एकजुट। हमने 11 जुलाई को पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल जी को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पंजाब के लोगों की भावनाओं को उनके सामने रखने के लिए आमंत्रित किया है।”]।
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आलाकमान के फैसले पर किसी को ऐतराज नहीं, सबको मिलेगा इंसाफ
चंडीगढ़ में चन्नी गुट से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान से किसी भी नेता या कार्यकर्ता की कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी साथियों से बहुत सकारात्मक माहौल में मुलाकात हुई है और सबने अपनी-अपनी बातें खुलकर रखी हैं। प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की सभी अटकलों को खारिज करते हुए बघेल ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने जो भी फैसला लिया है, उस पर किसी को कोई ऐतराज नहीं है और सभी साथी हाईकमान के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने नेताओं को विश्वास दिलाया कि वे महासचिव होने के नाते सभी के राजनैतिक हितों का पूरा खयाल रखेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि कोई भी नेता यह न सोचे कि उसके सिर पर किसी बड़े राजनेता का हाथ नहीं है तो उसके साथ अन्याय होगा, जो भी व्यक्ति जमीनी स्तर पर मजबूत और जीतने लायक होगा, उसे हाईकमान निश्चित रूप से टिकट देगा। इसके अलावा नेताओं ने जो अन्य सांगठनिक बातें रखी हैं, उन्हें वे जल्द ही आलाकमान तक पहुंचा देंगे।
चन्नी और रंधावा के कड़े तेवर और ‘समझौता न करने वाले’ नेता की मांग
बैठक से ठीक पहले जब पत्रकारों ने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से पूछा था कि क्या उन्हें राजा वडिंग का नेतृत्व स्वीकार है, तो चन्नी ने सीधे जवाब देने के बजाय कहा कि मीटिंग में हर मुद्दे पर विस्तार से बात की जाएगी। जब उन्हें याद दिलाया गया कि उनके समर्थक वडिंग के नेतृत्व का विरोध कर रहे हैं, तो चन्नी ने एक रहस्यमयी और पारंपरिक मुहावरा बोलते हुए कहा कि पहले चर्चा होने दीजिए, बाकी आगे चलकर ‘तेल देखेंगे और तेल की धार देखेंगे।’ वहीं दूसरी ओर, चन्नी गुट के बेहद मजबूत स्तंभ और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रभारी भूपेश बघेल के सामने बेहद कड़े तेवर दिखाए। रंधावा ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने बघेल साहब से स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि पंजाब कांग्रेस को कोई भी ऐसा नेता मंजूर नहीं है जो विरोधी ताकतों से किसी भी प्रकार का समझौता करता हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र और मुख्य मकसद आने वाले चुनावों में किसी भी तरह कांग्रेस पार्टी को दोबारा पंजाब की सत्ता में वापस लाना है।


