भारत-न्यूजीलैंड FTA से भारतीय निर्यात और निवेश में बड़ा फायदा, डेयरी सेक्टर सुरक्षित।
40 साल बाद भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच यह गोल्डन गेट खुल चुका है। यह एग्रीमेंट न केवल व्यापारियों के लिए, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस बात का अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापार 18,400 करोड़ रुपये से बढ़कर 2030 तक 35,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।
किन इंडस्ट्री को होगा सबसे ज़्यादा फायदा
फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट हमारे देश से लगभग 2024-25 में 480 करोड़ रुपये का हुआ था। फार्मास्यूटिकल्स पर 5% ड्यूटी थी, जो इस एग्रीमेंट के बाद 0% हो गई है।
टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 2024-25 में हमारे देश से न्यूज़ीलैंड को 800-1100 करोड़ रुपये का हुआ था, जिस पर 4% से लेकर 10% तक ड्यूटी लगती थी। इसे घटाकर 0% कर दिया गया है।
इसके अलावा कई हजारों प्रोडक्ट्स पर या तो ड्यूटी कम कर दी गई है या फिर पूरी तरह शून्य कर दी गई है, जिनकी जानकारी आपको इस PDF में मिल जाएगी – https://www.commerce.gov.in/files/2026-04/final_1.pdf
Free Trade Agreement का मतलब क्या है
Free Trade Agreement में न केवल Import या Export Duty हटाई जाती है, बल्कि दोनों देशों की सरकारें आगे बढ़कर मदद भी करती हैं। जैसे कि Customs Clearance जल्दी होना, व्यापारियों को Educate करना और Expo Organise करना, ताकि FTA का पूरा फायदा लिया जा सके।
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5000 भारतीयों को मिलेगा डॉलर कमाने का मौका
IT, Healthcare, Teaching और Construction Industry से जुड़े 5000 प्रोफेशनल भारतीयों के लिए न्यूज़ीलैंड के रास्ते खुल गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत न आए। इसके अलावा 1000 भारतीयों को Holiday Work Visa मिलेगा, जो 12 महीने तक वैध होगा।
न्यूज़ीलैंड ने भारतीय विद्यार्थियों को दी बड़ी सहूलियत
भारतीय छात्रों के लिए Post Study Work Visa बढ़ा दिए गए हैं। Bachelor के लिए 3 साल, Master के लिए 3 साल और Doctorate के लिए 4 साल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि वे अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद वहीं काम करके अनुभव हासिल कर सकेंगे।
न्यूज़ीलैंड करेगा भारत में 1.6 लाख करोड़ का निवेश
न्यूज़ीलैंड भारत के Agriculture, MSME और Women-led Enterprises में निवेश करेगा, ताकि भारत में रोजगार पैदा हो सके। साथ ही न्यूज़ीलैंड को वे सभी चीजें समय पर और बेहतर तरीके से मिलती रहें, जिनके लिए वह भारत जैसे देश पर निर्भर है।


