भारत में बांग्लादेश और फ्रांस जैसी हिंसा की साजिश थी? रिजिजू ने विपक्ष पर साधा निशाना

किरेन रिजिजू ने भारत में बांग्लादेश और फ्रांस जैसी हिंसा की कथित साजिश को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा
किरेन रिजिजू
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भारत में युवाओं को भड़काकर हिंसा फैलाने की साजिश रची गई थी. उन्होंने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई. रिजिजू ने यह आरोप ऐसे समय लगाया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है.

‘भारत न बांग्लादेश है, न फ्रांस’

किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हुई हिंसा और फ्रांस में हुए दंगों, आगजनी तथा लूटपाट जैसी स्थिति भारत में पैदा करने की साजिश रची गई थी. उन्होंने लिखा, “बांग्लादेश में हुई हिंसक घटना और फ्रांस में जो दंगे, आगजनी और लूटपाट हुईं, ठीक वैसी ही साजिश भारत के लिए भी रची गई थी.” रिजिजू ने आगे आरोप लगाया कि भारत विरोधी समूहों और कुछ नेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काया और सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि साजिश रचने वाले यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस.


‘भारत में सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव से संभव’

रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव है, न कि किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन के जरिए. उन्होंने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में सरकार बदलना संभव है, लेकिन यह केवल चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए. इससे पहले भी रिजिजू ने ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारत में सरकार का गठन जनता के जनादेश से होता है. उन्होंने विपक्ष पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के बाहर राजनीतिक बदलाव की कोशिश करने का आरोप लगाया.

प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ बयान से बढ़ा विवाद

यह राजनीतिक विवाद वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के उस बयान के बाद तेज हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को ‘रिजीम चेंज’ की लड़ाई बताया था. 15 अक्टूबर को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भूषण ने कहा था कि अगर सरकार चुनावी लोकतंत्र को कमजोर करती रही, तो सत्ता परिवर्तन की मांग उठेगी. उन्होंने इसे लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार बताया. भारतीय जनता पार्टी ने उनके बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद केवल चुनावी सुधार नहीं, बल्कि सरकार बदलने के लिए दबाव बनाना है.

नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर भी विवाद

इस विवाद में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा का नाम भी सामने आया है. रिपोर्टों के मुताबिक, बोरा ने बांग्लादेश में 2024 में हुए Gen Z के नेतृत्व वाले आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा था कि उससे भारत के युवाओं को भी प्रेरणा मिली. भाजपा ने उनके बयान को भारत में वैसी ही राजनीतिक उथल-पुथल की कोशिश से जोड़कर आलोचना की. वहीं, सरकार के आलोचकों ने कहा है कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है और इसे चुनावी पारदर्शिता तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी है सियासी टकराव

यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच सामने आया है. प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि भाजपा के नेताओं ने आंदोलन से जुड़े कुछ बयानों को सरकार बदलने की व्यापक कोशिश के रूप में पेश किया है.

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