नई दिल्ली: ‘केसरिया… मन जोगी हुआ रे’ और ‘बोलो जुबां केसरी’ जैसे विज्ञापनों से विमल का नाम घर-घर तक पहुंचा है। शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जैसे बड़े सितारे विमल इलायची के विज्ञापन में नजर आते हैं। हालांकि, अब यही विज्ञापन विवादों में है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने तीनों अभिनेताओं को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इलायची के नाम पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित पान मसाला या तंबाकू उत्पाद की ब्रांडिंग की जा रही है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertising) पर बहस छेड़ दी है। आखिर सरोगेट विज्ञापन क्या होता है, कंपनियां इसका इस्तेमाल क्यों करती हैं और भारत में इसे लेकर क्या कानून है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
क्या होता है सरोगेट विज्ञापन?
सरोगेट विज्ञापन का मतलब ऐसे विज्ञापन से है, जिसमें किसी प्रतिबंधित या सीधे विज्ञापित नहीं किए जा सकने वाले प्रोडक्ट की ब्रांड पहचान को किसी दूसरे प्रोडक्ट के जरिए प्रमोट किया जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी के तंबाकू, गुटखा या शराब जैसे उत्पाद का सीधा विज्ञापन प्रतिबंधित है, तो कंपनी उसी ब्रांड नाम से इलायची, माउथ फ्रेशनर, सोडा, मिनरल वॉटर या म्यूजिक जैसे दूसरे उत्पाद का विज्ञापन कर सकती है।
ऐसे विज्ञापनों में अक्सर ब्रांड का नाम, लोगो, रंग, पैकेजिंग, टैगलाइन और सेलिब्रिटी वही रखे जाते हैं, जिससे दर्शक दूसरे उत्पाद के बहाने मूल प्रतिबंधित उत्पाद को भी याद कर सके। यही ब्रांड रिकॉल सरोगेट विज्ञापन पर सवाल खड़े करता है।
विमल इलायची विज्ञापन पर क्यों हुआ विवाद?
महाराष्ट्र FDA का आरोप है कि विमल इलायची का विज्ञापन देखने में भले ही इलायची के प्रचार के लिए बनाया गया हो, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाली ब्रांडिंग और प्रस्तुति पान मसाला ब्रांड से जुड़ती है।
विज्ञापन में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जैसे सितारे नजर आते हैं। इसी वजह से नियामक ने यह जांच शुरू की है कि कहीं इलायची के बहाने प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद का अप्रत्यक्ष प्रचार तो नहीं किया जा रहा।
महाराष्ट्र में पान मसाला और तंबाकू उत्पादों को लेकर पहले से सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में इस विज्ञापन ने नियामक का ध्यान खींचा है।

शाहरुख, अजय और टाइगर को क्या नोटिस मिला?
FDA ने तीनों अभिनेताओं को नोटिस देकर उनसे विज्ञापन में उनकी भूमिका और एंडोर्समेंट को लेकर जवाब मांगा है। उन्हें निर्धारित समय के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा गया है।
नोटिस में विज्ञापन से जुड़े कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। साथ ही उनसे विज्ञापन में अपनी भागीदारी रोकने और सोशल मीडिया से संबंधित प्रमोशनल कंटेंट हटाने जैसे निर्देशों पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है।
सरोगेट विज्ञापन पर कानून क्या कहता है?
भारत में भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 और इसके तहत बनाए गए नियम लागू होते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने 2022 में भ्रामक विज्ञापनों और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट से जुड़े दिशानिर्देश भी जारी किए थे।
इसके अलावा, खाद्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापनों पर Food Safety and Standards Act, 2006 और संबंधित नियम लागू होते हैं।
खाद्य विज्ञापन अगर उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला पाया जाता है, तो संबंधित लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है। इसी संदर्भ में महाराष्ट्र FDA ने विमल इलायची विज्ञापन में शामिल सितारों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
सरोगेट विज्ञापन के चर्चित उदाहरण
भारत में शराब और तंबाकू ब्रांडों से जुड़े कई विज्ञापनों पर पहले भी सरोगेट विज्ञापन के आरोप लगते रहे हैं।
रॉयल स्टैग म्यूजिक: शराब ब्रांड के बजाय म्यूजिक के नाम से विज्ञापन किए गए, लेकिन ब्रांड की पहचान शराब से जोड़कर देखी जाती रही।
इंपीरियल ब्लू: म्यूजिक सीडी के नाम पर विज्ञापन प्रसारित हुए, जिनमें ब्रांड की पहचान शराब के मुख्य उत्पाद से जुड़ी मानी गई।
बैगपाइपर सोडा: सोडा के विज्ञापन में लोकप्रिय कलाकारों की मौजूदगी और ब्रांडिंग ने इसे शराब ब्रांड से जोड़ने की बहस को जन्म दिया।
किंगफिशर: पैकेज्ड वाटर, सोडा और अन्य ब्रांड एक्सटेंशन के जरिए ब्रांड की पहचान को मजबूत करने का उदाहरण अक्सर दिया जाता है।
माउथ फ्रेशनर और इलायची ब्रांड: तंबाकू और पान मसाला कंपनियों द्वारा इन उत्पादों के नाम पर विज्ञापन करना भी इसी बहस का हिस्सा रहा है।
सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर भी सवाल
सरोगेट विज्ञापन की बहस में सेलिब्रिटी की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। किसी बड़े अभिनेता या खिलाड़ी के विज्ञापन में शामिल होने से ब्रांड की पहुंच और पहचान तेजी से बढ़ती है। यही वजह है कि अगर विज्ञापन को भ्रामक या प्रतिबंधित उत्पाद के अप्रत्यक्ष प्रचार से जुड़ा पाया जाता है, तो विज्ञापन में शामिल सेलिब्रिटी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
विमल इलायची मामले में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस का जवाब देना होगा। FDA उनके स्पष्टीकरण, विज्ञापन की प्रस्तुति, ब्रांडिंग और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगा।
इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियामक इसे सामान्य इलायची विज्ञापन मानता है या प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद के सरोगेट प्रमोशन के तौर पर कार्रवाई आगे बढ़ाता है।
यानी विवाद सिर्फ एक विज्ञापन का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि क्या किसी प्रतिबंधित उत्पाद की ब्रांड पहचान को किसी दूसरे उत्पाद के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।