नई दिल्ली: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) मंगलवार को कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित कर दी गई। बैठक दोपहर 2:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑडियो-विजुअल माध्यम से आयोजित होनी थी, लेकिन जरूरी संख्या में सदस्य मौजूद नहीं होने के चलते इसे आगे बढ़ाना पड़ा।
टाटा संस के 100 से ज्यादा वर्षों के इतिहास में यह एक बेहद दुर्लभ घटनाक्रम है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कंपनी के इतिहास में पहली बार कोरम की कमी के कारण AGM स्थगित हुई है।
क्यों पूरा नहीं हुआ AGM का कोरम?
सूत्रों के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से नामित किए जाने वाले प्रतिनिधि को लेकर मौजूदा नियामकीय पाबंदी के कारण यह स्थिति बनी।
टाटा संस के Articles of Association के अनुसार AGM के लिए कम से कम पांच सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है। इसमें संबंधित संयुक्त नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी आवश्यक बताई गई है। लेकिन महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से जारी नियामकीय प्रतिबंध के कारण SRTT फिलहाल संयुक्त प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहा है। इसका सीधा असर बैठक के कोरम पर पड़ा।
एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे से भी चर्चा तेज
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। हालांकि, वह अगले साल फरवरी तक पद पर बने रहेंगे।
चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। इससे पहले इसी साल फरवरी में बोर्ड ने उन्हें दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया था।
टाटा संस के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
टाटा संस की स्थापना 1917 में हुई थी और कंपनी का कॉर्पोरेट गवर्नेंस का लंबा इतिहास रहा है। समूह के सामने बड़े कारोबारी और कानूनी विवाद आने के बावजूद सालाना बैठकें आयोजित होती रही हैं।
ऐसे में AGM का कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित होना टाटा संस के इतिहास में असाधारण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब कंपनी के लिए अगली AGM कब और किस व्यवस्था के तहत आयोजित की जाएगी, इस पर नजर रहेगी।