होर्मुज पर अमेरिका का कब्जा? ट्रंप के ‘NEW U.S. Territory’ पोस्ट से भड़का ईरान, बढ़ा तनाव

होर्मुज संकट के बीच ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की इच्छा जताई और बाद में सोशल मीडिया पर इसे अमेरिकी क्षेत्र के तौर पर दिखाने वाला नक्शा शेयर किया। ईरान के उप विदेश मंत्री ने ट्रंप के दावे को ‘भ्रम’ बताते हुए पलटवार किया। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी नाकाबंदी के कारण जलडमरूमध्य पर जहाजों की आवाजाही नियंत्रित है।
प के ‘New U.S. Territory’ पोस्ट से भड़का ईरान, होर्मुज पर बढ़ा तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को “NEW U.S. Territory” यानी “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया है। ट्रंप की इस पोस्ट ने ईरान के साथ पहले से जारी तनाव को और हवा दे दी है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ट्रंप की पोस्ट किसी औपचारिक कब्जे या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य क्षेत्र-विलय की घोषणा नहीं है। यह एक पोस्ट की गई तस्वीर है, जिसे ट्रंप ने बिना विस्तृत स्पष्टीकरण के साझा किया।

ट्रंप ने पहले क्या दावा किया था?

इससे पहले ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका के नियंत्रण का दावा कर चुके हैं। 12 अगस्त को उन्होंने कहा था कि अमेरिका के पास होर्मुज पर “total control” है और वह इसे बनाए रखने का इरादा रखता है। इससे पहले उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को “WALL OF STEEL” बताते हुए ईरान को चुनौती दी थी।

अब नई पोस्ट में होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र के तौर पर दिखाने वाली तस्वीर ने इस बयानबाजी को और आक्रामक बना दिया है।

ट्रम्प ने कहा – “मुझे लगता है कि यह एक अच्छा विचार है। हम नाकाबंदी के जरिए इसे नियंत्रित करते हैं। मैं इसे अपने क्षेत्र घोषित करने के विचार को पसंद करता हूं। हमारे पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण है। नाकाबंदी बहुत प्रभावी रही है। हम हर हफ्ते लाखों बैरल तेल निकाल रहे हैं”।

ईरान का क्या कहना है?

ईरान लगातार अमेरिका के नियंत्रण के दावे को खारिज करता रहा है। तेहरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण है और अमेरिका स्थिति को लेकर गलत आकलन कर रहा है। ईरानी पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य को पूरी तरह से सामान्य व्यावसायिक आवाजाही के लिए नहीं खोला जाएगा।

18 अगस्त को ईरान ने कहा कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते से जुड़ी उसकी मांगों को पूरा नहीं करता। इनमें अमेरिकी नाकाबंदी हटाना, तेल प्रतिबंधों में राहत और ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना जैसी मांगें शामिल हैं।

60 दिन की डील खत्म, बातचीत पर संकट

अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए समझौते के तहत व्यापक शांति समझौते की दिशा में बातचीत के लिए 60 दिनों की अवधि तय की गई थी। यह समयसीमा 17 अगस्त को खत्म हो गई, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई व्यापक समझौता नहीं हो सका।

इसके बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में ट्रंप की नई पोस्ट ने तनाव कम करने के बजाय स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक तनाव या समुद्री यातायात में बाधा आने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर बढ़ता विवाद केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

तनाव बढ़ने की खबरों के बीच तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। रॉयटर्स के मुताबिक 18 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 91.07 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो जुलाई के अंत के बाद का उच्च स्तर था।

क्या अमेरिका ने सच में होर्मुज पर कब्जा कर लिया?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। ट्रंप की पोस्ट में होर्मुज को “NEW U.S. Territory” बताया गया है, लेकिन यह कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र-विलय या संप्रभुता स्थापित होने का प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर सैन्य और राजनीतिक टकराव जरूर गंभीर बना हुआ है।

ऐसे में ट्रंप की यह पोस्ट आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा सकती है, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच बातचीत पहले ही ठहराव में पहुंच चुकी है।

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