उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगंपा) की जिला इकाई ने कैमूर पर्वत श्रृंखला में रहने वाले आदिवासियों के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन निजी कंपनियों द्वारा लगाए जा रहे विकास परियोजनाओं के खिलाफ था, जिससे स्थानीय लोगों में अपने विस्थापन और पर्यावरण विनाश का गहरा डर है।
सोमवार को बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण और गोंगंपा के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय में जमा हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर निजी कंपनियों के माध्यम से विनाश कर रही है, जिससे आदिवासी और जीव-जंतु विस्थापन के लिए मजबूर हो रहे हैं। उनका मुख्य विरोध उन कंपनियों के प्रोजेक्टों को लेकर था, जिनके कारण उनके गांव उजड़ जाएंगे, और करोड़ों की संख्या में पेड़-पौधे काटे जाएंगे।
प्रदर्शनकारियों ने नगवां और कोन ब्लॉक के ससनई और चकरिया समेत कई गांवों में प्रस्तावित 7 कंपनियों के प्रोजेक्टों का विरोध किया। ग्रामीणों ने अपनी वर्तमान जीवनशैली को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट लगने से पशु-पक्षियों और अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास छिन जाएगा, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारें कॉर्पोरेट घरानों के हाथों प्राकृतिक संपदा बेच रही हैं और जनसमस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति, जनजाति मंत्रालय, पर्यावरण विभाग, वन विभाग और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि कंपनियों को यहां प्रोजेक्ट न लगाने दिया जाए और ग्रामीणों को किसी भी कीमत पर विस्थापित न किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल सुनवाई नहीं होती है, तो वे भविष्य में एक उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
सोनभद्र के आदिवासियों का यह आंदोलन दिखाता है कि विकास की आड़ में होने वाले विस्थापन और पर्यावरण क्षति के खिलाफ संघर्ष कितना मजबूत है। अब देखना यह है कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार के संबंधित मंत्रालय इस मांग पत्र पर क्या कार्रवाई करते हैं।









