पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद राजनीतिक गरमी पैदा कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रशासनिक मोर्चा संभाल रही हैं। उन्होंने हाल ही में जिला मजिस्ट्रेटों (DMs) की एक बैठक में अचानक पहुंचकर अधिकारियों को सख्त और संवेदनशील तरीके से काम करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का यह हस्तक्षेप आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार दोपहर राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चल रही जिला मजिस्ट्रेटों की बैठक में अप्रत्याशित रूप से शामिल हुईं। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि SIR से जुड़ा हर काम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार ही किया जाए। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
नागरिकों को राहत के लिए कड़े निर्देश
1. मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं:- मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि “तार्किक विसंगतियों” (Logical Discrepancies) के नाम पर आम लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से इस पूरे मामले को मानवीय नजरिए से देखने का आग्रह किया।
2. दस्तावेजों की स्वीकार्यता:- उन्होंने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्य किए गए सभी दस्तावेजों को सुनवाई के दौरान बिना किसी अपवाद के स्वीकार किया जाए।
3. रसीद देना अनिवार्य:- सीएम ने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति दस्तावेज जमा करे, उसे अनिवार्य रूप से उसकी रसीद दी जाए ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कत न हो।
4. वैकल्पिक सुनवाई व्यवस्था:- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह भी निर्देश दिया कि जो वोटर तय तारीख पर सुनवाई में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
विकास कार्य और भरोसा
आगामी महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि चुनाव आयोग का काम अपनी जगह जरूरी है, लेकिन राज्य के विकास कार्यों पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी विकास योजनाएं तय समय पर पूरी हों। साथ ही, उन्होंने अफसरों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस हस्तक्षेप से यह उम्मीद जगी है कि SIR प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को हो रही परेशानियों में कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप संवेदनशील ढंग से पूरी की जाएगी।









