अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और व्यापार के मैदान में भारत की स्थिति तेजी से मजबूत हो रही है। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ लगाने की धमकियों ने वैश्विक व्यापार पर चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ भारत को यूरोपीय संघ (EU) का खुला और रणनीतिक समर्थन मिला है। यह समर्थन केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह घटनाक्रम वैश्विक संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका का स्पष्ट प्रमाण है।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की प्रमुख (Foreign Affairs Chief) काजा कल्लास ने हाल ही में साफ किया है कि भारत और यूरोपीय संघ के संबंध अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने भारत को यूरोप के लिए व्यापार और सुरक्षा दोनों ही मामलों में ‘बेहद जरूरी साझेदार’ बताया है। इस बयान के मायने बड़े हैं, क्योंकि यूरोप अब भारत को सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है। यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी टैरिफ की चेतावनियां दुनिया भर के निर्यातक देशों के लिए तनाव पैदा कर रही हैं।
इस रणनीतिक नजदीकी के बीच, भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है। विशेषज्ञ इस डील को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कह रहे हैं। यदि यह समझौता हो जाता है, तो भारत और यूरोप मिलकर 2 अरब से अधिक लोगों के एक विशाल बाजार को जोड़ देंगे। इस FTA से भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप में निर्यात करना आसान हो जाएगा और देश में बड़े पैमाने पर निवेश और तकनीक के नए अवसर खुलेंगे।
इस साझेदारी को और गति देने के लिए, EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन खुद भारत आने वाली हैं। वे 26 और 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा और सुरक्षा जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों पर अहम समझौते होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को अमेरिका के संभावित टैरिफ दबाव से बचने और खुद को एक मजबूत, स्वतंत्र आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
यह स्पष्ट है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकती हैं। अमेरिका की सख्ती के बावजूद यूरोप का यह खुला समर्थन दर्शाता है कि आने वाले समय में भारत-EU के रिश्ते वैश्विक व्यापार और कूटनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।









