तमिलनाडु की सियासत इन दिनों तेज़ी से बदल रही है। 2026 विधानसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी तैयारी को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। हाल ही में AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (Edappadi K. Palaniswami) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेताओं के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने विपक्षी दलों के सामने एक मजबूत चुनौती खड़ी कर दी है।
पलानीस्वामी ने अपने घर पर भाजपा प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया, जहाँ नाश्ते पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य NDA गठजोड़ को मज़बूत करना और प्रदेश में सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) सरकार को चुनौती देने के लिए एक ‘एकजुट मोर्चा’ तैयार करना था।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने भी AIADMK और NDA के भविष्य के एजेंडे पर एडप्पादी के. पलानीस्वामी से व्यापक बातचीत की। 2025 में घोषित इस गठबंधन को अब चुनावी तैयारी में गति देने की कोशिश की जा रही है, ताकि 2026 के चुनाव में DMK-नीत गठबंधन को प्रभावी ढंग से हराया जा सके।
इस बीच, गठबंधन को और व्यापक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। T.T.V. दिनाकरन (T.T.V. Dhinakaran) की पार्टी AMMK ने भी NDA में वापसी करते हुए समर्थन देने का फैसला किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AMMK का यह कदम NDA को दक्षिण तमिलनाडु में और अधिक मज़बूती प्रदान करेगा, जिससे राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह एकजुटता विपक्षी गठबंधन के खिलाफ एक मजबूत चुनावी मोर्चा तैयार करती दिख रही है, जो 2026 के चुनावों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
फिलहाल, तमिलनाडु में राजनीतिक गर्मी चरम पर है और NDA की यह नवीनतम रणनीतिक तैयारी दर्शाती है कि आगामी विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे।


