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ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का ऐलान: पाकिस्तान भी सदस्य, क्या यह UN का विकल्प बनेगा?

ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' का किया ऐलान

आज के दौर में जब दुनिया युद्धों और संघर्षों से थकी हुई है, अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा दावा किया गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में औपचारिक रूप से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) नामक एक नए वैश्विक मंच की घोषणा की है। उनका दावा है कि यह मंच युद्धों को रोकने और दुनिया भर में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में शांति की नई राह खोलेगा या वैश्विक शक्तियों का एक नया केंद्र बन जाएगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के पहले चार्टर की औपचारिक घोषणा की। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह संयुक्त राष्ट्र (UN) का विकल्प नहीं है, बल्कि यह UN और दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि दुनिया को तेज और ठोस फैसले मिल सकें। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले कुछ समय में 8 बड़े युद्धों को टालने में भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के तनाव का जिक्र करते हुए इशारों में कहा कि स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती थी, लेकिन इसे रोका गया।

ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को दुनिया की सबसे भयावह जंग बताया और कहा कि इसे जितना आसान समझा गया था, यह उतना ही मुश्किल हो गया है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में दुनिया के कई अहम देश शामिल किए गए हैं, जिनमें अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्किये, पाकिस्तान, मिस्र, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, हंगरी, बहरीन और उज़्बेकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इस बोर्ड का उद्देश्य पूर्व, पश्चिम, एशिया और यूरोप, सभी को साथ लाकर शांति स्थापित करना है।

बोर्ड की घोषणा के समय कई राष्ट्राध्यक्ष मंच पर मौजूद थे, जिनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान प्रमुख थे। गाजा युद्ध पर ट्रंप का रुख बेहद सख्त था। उन्होंने कहा कि युद्ध अब खत्म हो रहा है, लेकिन हमास को सीधी चेतावनी दी कि ‘हथियार डाल दो, वरना ये तुम्हारा अंत होगा।’ उन्होंने संघर्षविराम के अच्छे नतीजे दिखने का भी दावा किया।

ट्रंप द्वारा घोषित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ निश्चित रूप से वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा कदम है। यह देखना बाकी है कि क्या यह नया मंच वाकई युद्ध रोक पाएगा या सिर्फ एक और ताकतवर मंच बनकर रह जाएगा। दुनिया देख रही है, क्योंकि शांति सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस इरादों और नतीजों से आती है।