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पटका विवाद: राष्ट्रपति भवन से शुरू हुआ सियासी तूफान, राहुल गांधी पर BJP का तीखा हमला

राष्ट्रपति भवन से शुरू हुआ सियासी तूफान

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम रिसेप्शन’ कार्यक्रम से उपजा ‘पटका विवाद’ अब देश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर चुका है। यह कार्यक्रम उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशी राजनयिकों ने जहां गर्व से पारंपरिक पटका (गमोसा) पहना, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बिना पटका नज़र आने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें घेर लिया है। यह मामला अब संस्कृति के सम्मान बनाम राजनीतिक संवेदनशीलता की बहस बन गया है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष रिसेप्शन की थीम North-East India की सांस्कृतिक विरासत थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों सहित कई गणमान्य लोगों ने पारंपरिक पटका पहनकर उत्तर-पूर्व की संस्कृति के प्रति सम्मान जताया। हालांकि, इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बिना पटका नजर आए, जिसने फौरन विवाद को जन्म दे दिया।

बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि राहुल गांधी को राष्ट्रपति ने दो बार पटका पहनने की याद दिलाई, जिसे उन्होंने कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया। बीजेपी का आरोप है कि यह सिर्फ कपड़ों का मामला नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व की संस्कृति और भावनाओं का अपमान है।

विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं:

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, “राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी मेहमानों ने जहां गर्व से पटका पहना, वहीं राहुल गांधी अलग खड़े रहे। यह उत्तर-पूर्व के लोगों के प्रति उनकी असंवेदनशीलता दर्शाता है।” सरमा ने कांग्रेस नेता से बिना शर्त माफी की मांग की और कहा कि इसी रवैये के कारण कांग्रेस ने पूर्वोत्तर में अपनी सियासी जमीन खोई है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जवाबी हमला करते हुए उसी कार्यक्रम की एक तस्वीर साझा की, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी बिना पटका नज़र आ रहे थे। खेड़ा का सीधा सवाल था कि क्या अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी माफी मंगवाई जाएगी? या फिर यह पूरा मामला सिर्फ राजनीतिक प्रोपेगेंडा है?

कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने बीजेपी पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी बेवजह के मुद्दों को उछालकर देश के असली सवालों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि पटका (गमोसा) असम और उत्तर-पूर्व भारत में सम्मान, स्वागत और सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। सरकारी कार्यक्रमों में थीम के अनुसार पारंपरिक परिधान पहनना सांकेतिक सम्मान होता है, यह कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।

यह विवाद दिखाता है कि भारतीय राजनीति में अब सांस्कृतिक प्रतीकों का उपयोग तेजी से राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। पटका पहनने या न पहनने का यह छोटा सा मुद्दा अब देश में संस्कृति और राजनीति के मिश्रण पर एक बड़ी बहस को जन्म दे चुका है।