पिछले हफ्ते शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को शानदार बढ़त दर्ज करने के बाद, कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ खुले। इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार थे, जिनमें आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली, विदेशी निवेशकों का बाहर जाना और आगामी केंद्रीय बजट से पहले निवेशकों की सतर्कता प्रमुख रही।
तीन दिन की लगातार तेजी के बाद शुक्रवार को बाजार में लाल निशान छा गया। गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 221.69 अंक उछलकर 82,566.37 अंक पर बंद हुआ था, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 76.15 अंक की बढ़त के साथ 25,418.90 पर पहुंचा था। हालांकि, शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ही 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 619.06 अंक गिरकर 81,947.31 पर आ गया, और निफ्टी भी 171.35 अंक टूटकर 25,247.55 पर पहुंच गया।
गिरावट का मुख्य कारण आईटी (IT) शेयरों में भारी बिकवाली थी। इसके अलावा, विदेशी निधियों की ताजा निकासी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बाजार पर दबाव बनाया। निवेशक 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सतर्कता बरत रहे थे। शुरुआती कारोबार में टीसीएस (TCS), इंफोसिस, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, एनटीपीसी और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा नुकसान में रहीं। हालांकि, मारुति, आईटीसी, एशियन पेंट्स और इंटरग्लोब एविएशन जैसी कंपनियों ने बढ़त हासिल की। शुरुआती कारोबार में रुपया निचले स्तर से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 9 पैसे की बढ़त के साथ 91.90 पर पहुंच गया।
बाजार के लिए भू-राजनीतिक चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं। ट्रंप द्वारा टैरिफ को हथियार बनाने की धमकियां वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं। इसके साथ ही, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने से भारतीय मैक्रोइकॉनॉमिक्स पर दबाव बढ़ रहा है, खासकर तेल का उपयोग करने वाले उद्योगों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।
आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से केंद्रीय बजट की घोषणाओं और वैश्विक व्यापार तनाव पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।









