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गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड: ‘पढ़ाई का अत्यधिक दबाव’ बनी वजह? महिला आयोग ने उठाया बड़ा कदम

गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड मामले की जांच, महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बच्चों पर पढ़ाई के दबाव को बताया मुख्य कारण।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित भारत सिटी सोसाइटी में हाल ही में सामने आए ट्रिपल सुसाइड मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। तीन नाबालिग बच्चियों द्वारा नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की इस दर्दनाक घटना पर जांच लगातार जारी है। इसी क्रम में, यूपी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने मौके का दौरा किया और इस त्रासदी के पीछे छिपे गंभीर कारणों पर प्रकाश डाला, जिसके बाद आयोग ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्देश जारी किया है।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने भारत सिटी सोसाइटी पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी ली।

मीडिया से बातचीत में, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने इस घटना के कारणों पर शुरुआती जांच के आधार पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “प्रथम दृष्टया यही सामने आता है कि बच्चों पर पढ़ाई का दबाव बहुत ज़्यादा था और उनकी मानसिक स्थिति को समय रहते समझा नहीं गया। बच्चे भविष्य में नहीं, वर्तमान में जीते हैं। उनकी भावनाओं को समझना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर पढ़ाई या किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव न डालें और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें।

आयोग का बड़ा फैसला: ऑनलाइन होमवर्क पर रोक

इस हृदय विदारक घटना के बाद महिला आयोग ने बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करने के लिए तत्काल एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाया है। आयोग की ओर से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि कक्षा पांच से कम उम्र के बच्चों को अब ऑनलाइन होमवर्क न दिया जाए। इस कदम का उद्देश्य छोटे बच्चों पर पढ़ाई और स्क्रीन का अत्यधिक मानसिक दबाव कम करना है। महिला आयोग ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की गहन जांच कर जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को भी कहा है। पुलिस और प्रशासन की टीमें हर एंगल से मामले की जांच में जुटी हुई हैं।

यह दुखद घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह देश भर के अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के लिए एक अलार्म है, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक दबाव के बीच सही संतुलन खोजने की आवश्यकता पर जोर देता है।