सूरजकुंड हादसे का दुखद अपडेट: लोगों को बचाते हुए शहीद हुए SHO जगदीश सारस्वत, 31 मार्च को होना था रिटायर

सूरजकुंड मेले के हादसे में शहीद हुए पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र सारस्वत, जिन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए खुद को बलिदान कर दिया।

फरीदाबाद के प्रसिद्ध सूरजकुंड मेले से आई एक दुखद खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। मेले में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान झूला गिरने से हुए एक भीषण हादसे में मथुरा निवासी पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र सारस्वत की दर्दनाक मौत हो गई। दुख की बात यह है कि यह हादसा उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी आखिरी सांस तक कर्तव्य निभाते हुए बहादुरी का सर्वोच्च उदाहरण पेश किया।

मथुरा के लोहवन के ढेहरुआ गांव के मूल निवासी इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र सारस्वत वर्तमान में पलवल में एसएचओ (SHO) के पद पर तैनात थे। वे सूरजकुंड मेले में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ड्यूटी पर थे।

जानकारी के अनुसार, मेले में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान अचानक झूला गिर गया। इस हादसे में मौके पर ही एक महिला समेत इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र सारस्वत की मौत हो गई।

सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इंस्पेक्टर सारस्वत 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले थे। रिटायरमेंट की खुशियों का इंतजार कर रहे परिवार को इस खबर ने तोड़ दिया।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जब झूला टूटकर गिरा और चीख-पुकार मची, तो जगदीश चंद्र सारस्वत दबे हुए लोगों को बचाने के लिए तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। वे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर ही रहे थे कि झूले का दूसरा हिस्सा अचानक गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आने से उनकी जान चली गई। उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।

इंस्पेक्टर सारस्वत के निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव देंगरा/ढेहरुआ में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पीछे उनका भरा-पूरा परिवार है—जिसमें विवाहित पुत्र, विवाहित बड़ी बेटी और एक छोटी बेटी शामिल हैं, जो अभी पढ़ाई कर रही है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फिलहाल पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र सारस्वत ने दूसरों की जिंदगी बचाने की कोशिश में जो शहादत दी है, वह पुलिस विभाग के लिए कर्तव्यनिष्ठा और मानवीयता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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