बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का पारिवारिक विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। इस बार लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने पार्टी के भीतर ‘अपनों’ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीधे-सीधे पांच कद्दावर पार्टी नेताओं को ‘जयचंद’ करार देते हुए उनके नाम सार्वजनिक किए हैं, जिन पर परिवार और पार्टी को तोड़ने की साजिश रचने का आरोप है। खास बात यह है कि इस सूची में वे सभी नाम शामिल हैं जो तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं।
लालू परिवार की राजनीति में बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब चरम पर है। तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि ये पांच नेता उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से दूर रखने और भाई-भाई को लड़ाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बाकायदा क्रम बताते हुए इन ‘साजिशकर्ताओं’ के नाम सामने रखे हैं। तेज प्रताप ने इन नेताओं को ‘जयचंद’ कहकर संबोधित किया है, जो भारतीय समाज में विश्वासघात का प्रतीक माना जाता है।
तेज प्रताप यादव द्वारा जारी किए गए इन पांच ‘जयचंदों’ की सूची और उन पर लगे मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
1. मुकेश रौशन (महुआ के पूर्व विधायक): एक समय में तेज प्रताप के बेहद करीबी माने जाने वाले मुकेश रौशन अब उनके निशाने पर हैं। तेज प्रताप का मानना है कि मुकेश रौशन ने उनके खिलाफ काम किया, जिससे उनके पुराने रिश्ते टूट गए हैं।
2. संजय यादव (राज्यसभा सांसद और तेजस्वी के रणनीतिकार): संजय यादव को तेजस्वी यादव का ‘दायां हाथ’ माना जाता है। तेज प्रताप यादव अक्सर यह आरोप लगाते रहे हैं कि संजय यादव जैसे बाहरी लोग परिवार के बीच में आकर भाई-भाई को लड़ाने का काम करते हैं और उन्हें राजनीति से दूर रखते हैं।
3. रमीज नेमत (तेजस्वी यादव के निजी सहयोगी): रमीज तेजस्वी के साथ साये की तरह रहते हैं। तेज प्रताप का आरोप है कि रमीज जैसे लोग सूचनाओं को फिल्टर करते हैं और उनके खिलाफ तेजस्वी के कान भरते हैं। इससे पहले तेज प्रताप की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने भी रमीज की घुसपैठ पर सवाल उठाया था।
4. शक्ति सिंह यादव (आरजेडी प्रवक्ता): आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव पर तेज प्रताप का आरोप है कि वे सार्वजनिक रूप से पार्टी की बात करते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर तेज प्रताप की छवि बिगाड़ने का काम करते हैं।
5. सुनील सिंह (एमएलसी और बिस्कोमान अध्यक्ष): विधान पार्षद सुनील सिंह को राबड़ी देवी का मुंहबोला भाई माना जाता है। तेज प्रताप के साथ उनके रिश्ते लंबे समय से तल्ख हैं। तेज प्रताप को लगता है कि सुनील सिंह अपनी पहुंच का इस्तेमाल उनके राजनीतिक कद को छोटा करने में कर रहे हैं।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान, तेज प्रताप यादव ने एक निजी विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक महिला और एक व्यक्ति के कथित रिश्ते में उनका नाम घसीटा जा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा पहुंच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अपमान के खिलाफ अब वह न्याय के लिए अदालत का रुख करेंगे।
तेज प्रताप द्वारा सीधे तौर पर पार्टी के कद्दावर और तेजस्वी के करीबी नेताओं पर हमला करना, यह साफ करता है कि आरजेडी में आंतरिक संघर्ष अब एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है। लालू परिवार की यह खुली जंग आने वाले दिनों में बिहार की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।









