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ऑपरेशन सिंदूर की ‘आवाज’ कर्नल सोफिया कुरैशी को विशिष्ट सेवा पदक, जानिए क्यों देश को है उन पर गर्व

कर्नल सोफिया कुरैशी को विशिष्ट सेवा पदक

77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा सशस्त्र बलों के लिए वीरता पुरस्कारों की मंजूरी ने एक बार फिर देश की असाधारण प्रतिभाओं को सामने ला दिया है। इस सूची में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) के लिए चुनी गईं कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम विशेष रूप से चमक रहा है। वह भारतीय सेना की वो अधिकारी हैं, जिनकी शांत, सटीक और आत्मविश्वास से भरी आवाज़ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए झूठ और अफवाहों को बेनकाब किया था।

कर्नल सोफिया कुरैशी को यह सम्मान उनकी असाधारण सेवा के लिए दिया जा रहा है। उनकी प्रमुख भूमिका तब सामने आई जब देश पहलगाम आतंकी हमले के बाद गुस्से और चिंता में था। उस दौरान सोशल मीडिया पर पाकिस्तान लगातार झूठी खबरें फैला रहा था।

ऑपरेशन सिंदूर के समय कर्नल सोफिया कुरैशी ने भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ मिलकर दैनिक मीडिया ब्रीफिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने दुनिया के सामने बिना किसी उकसावे या डर के भारत की रणनीति, संयम और शक्ति को मजबूती से रखा। उनकी सटीक जानकारी और अटूट आत्मविश्वास ने भारतीय सेना के तथ्यों को दुनिया के सामने बुलंद रखा।

कर्नल सोफिया कुरैशी का जन्म 1981 में वडोदरा में हुआ था। राष्ट्र सेवा का जज्बा उन्हें विरासत में मिला—उनके दादा और पिता दोनों भारतीय सेना में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी से बायोकैमिस्ट्री में एमएससी की डिग्री हासिल की और उनका सपना प्रोफेसर बनने का था। हालांकि, देश की पुकार पर उन्होंने पीएचडी और लेक्चरर की नौकरी छोड़कर 1999 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए कोर ऑफ सिग्नल्स में प्रवेश किया।

2006 में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना संचालन (UN Peacekeeping Operations) के तहत कांगो में 6 साल तक सेवा दी। उन्होंने बहुराष्ट्रीय सेनाओं के साथ मिलकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2016 में, सोफिया कुरैशी ने तब इतिहास रचा, जब वह ‘एक्सरसाइज फोर्स 18’ में 18 देशों के बीच भारतीय सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

कर्नल सोफिया कुरैशी का यह सफर वडोदरा की गलियों से शुरू होकर विशिष्ट सेवा पदक तक पहुंचा है, जो न सिर्फ उनकी वर्दी बल्कि उनके साहस को भी गौरवान्वित करता है। वह आज सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि देश की हर बेटी के लिए त्याग और समर्पण की एक बड़ी मिसाल हैं।

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