मथुरा के कृष्णानगर क्षेत्र में सिंचाई विभाग ने ड्रेनेज की सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने करीब 200 मकानों के मालिकों को अंतिम नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में कब्जा नहीं हटाया गया, तो बलपूर्वक बड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसका खर्च भी कब्जाधारकों को ही उठाना होगा।
सिंचाई विभाग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, यह सख्त कार्रवाई 24 जनवरी से शुरू की जा सकती है, जिसके लिए पुलिस बल की मदद ली जाएगी। विभाग ने पहले ही उन सभी मकानों पर लाल निशान लगा दिए थे, जिन्हें ड्रेनेज भूमि पर अवैध रूप से बनाया गया है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के तहत की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि ड्रेनेज भूमि पर अवैध कब्जे के कारण जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई थी।
अतिक्रमण के चलते बारिश के दौरान नालों और ड्रेनेज सिस्टम के अवरुद्ध होने से सड़कों और रिहायशी कॉलोनियों में गंभीर जलभराव होता था। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था और पर्यावरणीय समस्याएं भी पैदा हो रही थीं।नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय समय सीमा (सात दिन) के भीतर स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो बलपूर्वक कार्रवाई के दौरान आने वाला पूरा खर्च भी संबंधित कब्जाधारकों से ही वसूला जाएगा।
प्रशासन का उद्देश्य सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करके ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह सुचारु बनाना है, ताकि कृष्णानगर क्षेत्र को भविष्य में जलभराव जैसी गंभीर समस्याओं से राहत मिल सके।
क्षेत्र में इस बड़े प्रशासनिक कदम को लेकर हलचल मची हुई है। प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से बचने के लिए स्वयं ही निर्धारित समय सीमा में अवैध कब्जे हटा लें, क्योंकि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना अब विभाग की शीर्ष प्राथमिकता है।









