पटना: मोकामा के विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है. इस मामले में बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए अनंत सिंह के खिलाफ कई अहम तथ्य पेश किए थे. सरकार ने अपने हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच से जुड़ी जानकारी दी थी.
अनंत सिंह की जमानत क्यों रद्द हुई?
मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह जेल से बाहर आए थे. दुलारचंद यादव के परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के बाद जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीवी वराले की पीठ ने उनकी जमानत रद्द कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिये से नहीं देखा जा सकता. अदालत के मुताबिक, हाईकोर्ट ने अनंत सिंह के पुराने आपराधिक मामलों पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया था. कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
1. हत्या को सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं माना जा सकता
अनंत सिंह की ओर से दलील दी गई थी कि दुलारचंद यादव की हत्या चुनाव के दौरान हुई और इसी वजह से उनका नाम मामले में शामिल किया गया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस घटना को केवल राजनीतिक हत्या या विवाद मानकर नहीं देखा जा सकता.
2. अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे मुकदमे के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे. अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया.
3. पुलिस को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश
शीर्ष अदालत ने पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा. अनंत सिंह ने अपनी बेटी की शादी का हवाला देते हुए तत्काल सरेंडर से राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया.
सम्राट चौधरी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखीं ये 3 दलीलें
पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ दुलारचंद यादव के परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. इस सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने भी जवाबी हलफनामा पेश किया था. सरकार ने अक्टूबर 2026 के तीसरे सप्ताह में दाखिल हलफनामे में तीन प्रमुख बातें रखीं.
1. अनंत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी
बिहार सरकार ने अदालत को बताया कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में एसडीपीओ और एसपी स्तर पर जांच की निगरानी के बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. सरकार ने अपने पक्ष में इस तथ्य का उल्लेख किया कि मामले में अनंत सिंह का नाम आरोपियों में शामिल है.
2. अनंत सिंह के खिलाफ 62 आपराधिक मामलों का जिक्र
सरकार ने हलफनामे में बताया कि अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत कुल 62 आपराधिक मामले दर्ज हैं. सरकार ने उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को जमानत रद्द करने की मांग के समर्थन में अहम आधार के तौर पर पेश किया.
3. जमानत रद्द करने की मांग
बिहार सरकार का कहना था कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए उन्हें जेल से बाहर रखना उचित नहीं है. इसी आधार पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से उनकी जमानत रद्द करने की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में पुराने मामलों का भी जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अनंत सिंह के पुराने आपराधिक मामलों पर विचार नहीं किए जाने को भी महत्वपूर्ण माना. अदालत के आदेश के बाद अब उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में सरेंडर करना होगा.


